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लॉकडाउन में दस हजार करोड़ डूबे, पटरी पर नहीं लौटा कारोबार
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जम्मू। पिछले साल से कोरोना की मार झेल रहे कारोबारी संक्रमण की दूसरी लहर से चिंतित हो गए हैं। तीन माह सख्त लॉकडाउन के दौरान जम्मू-कश्मीर में कारोबारियों को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। कई कारोबारियों को काम तक बदलना पड़ा। कारोबार अभी तक पटरी पर नहीं लौट पाया है। अब फिर से कारोबारी तबका मंदी की आशंका से चिंतित है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले नुकसान का न तो मुआवजा मिला और न सरकार से प्रोत्साहन। कोरोना महामारी को लेकर फिर से सख्त पाबंदियां लगने के आसार हैं, ऐसे में सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग उठाई गई है, जिस पर अभी तक बड़ी घोषणा नहीं हो पाई है।
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बिजली, पानी और ब्याज माफ करे सरकार : चैंबर
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के प्रधान अरुण गुप्ता ने कहा कि 2020 में कोविड के दौरान तीन माह तक पूरी तरह से प्रतिष्ठान बंद रहने से कारोबार चौपट हो गया। प्रधानमंत्री की अपील पर कारोबारियों ने अपने मुलाजिमों को समय पर वेतन दिया, लेकिन उनके बदले उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया। बैंकों से ली लिमिट पर ब्याज में कोई राहत नहीं दी गई है। कोविड अवधि के दौरान बैंक ब्याज को पूरी तरह से माफ किया जाए। इसके अलावा बिजली और पानी के शुल्क पूरी तरह से माफ किए जाने चाहिए। सरकार को कारोबारियों के लिए कोई विशेष पैकेज लाना चाहिए।
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बैंक लोन के ब्याज ने ही बढ़ा
दिया 500 करोड़ का बोझ
चैंबर आफ ट्रेडर्स फेडरेशन के प्रधान नीरज आनंद कहते हैं कि कारोबारियों पर सिर्फ ब्याज को ही लेकर 400-500 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ बढ़ा है। सरकार ने बैंक ब्याज पर कुछ रियायत दी, लेकिन कोविड अवधि में जब सब कुछ बंद ही रहा तो कारोबारी कैसे ब्याज दर अदा कर सकते हैं। कोविड अवधि के दौरान बैंक ऋणों पर ब्याज को पूरी तरह से माफ करना चाहिए। बाजार में कारोबारियों के पास नकद की समस्या इसलिए भी आई है कि जम्मू-कश्मीर के विभिन्न विभागों में करीब 600 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया है। कारोबारियों और उद्योगपतियों ने बाजार से सामान उठाकर विभागों को सप्लाई किया है, जिसका भुगतान अटक गया है।
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कारोबारियों को उचित पैकेज दे सरकार
लिंक रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि कोरोना को लेकर कारोबारी फिर दहशत में हैं। सरकार को कारोबारियों को राहत देने के लिए उचित पैकेज लाना चाहिए। खासतौर पर बैंकों की लिमिट को लेकर ब्याज पर अधिक राहत दी जानी चाहिए। पिछले साल जैसे हालात बन रहे हैं, हालांकि कोरोना को लेकर कारोबारियों के साथ ग्राहकों को पूरी तरह से एहतियात बरतनी चाहिए।
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होटल व्यवसाय 90 फीसदी प्रभावित
आल जम्मू होटल एंड लॉजेस एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने कहा कि कोविड और अनलॉक में भी होटल व्यवसाय सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। पिछले एक साल से जम्मू में ही 300 से अधिक होटल 90 फीसदी खाली चल रहे हैं। हालांकि अभी कुछ पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर की ओर कदम बढ़ाए थे, लेकिन दोबारा कोरोना को देखते हुए होटल व्यवसाय पर मंदी का संकट मंडरा रहा है। उन्होंने मांग की कि होटल व्यवसाय को उद्योग की तर्ज पर राहत और प्रोत्साहन दिया जाए। उन्हें कामर्शियल बिजली के बिल भेजे जाते हैं, जबकि उद्योगों को इसमें राहत दी गई है। इसी तरह अन्य राहत भी दी जाएं।
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कारोबार को दोबारा खड़ा करने की चुनौती
कनक मंडी ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान अनूप मित्तल ने कहा कि कोविड अवधि के दौरान सभी तरह के कारोबारियों पर शुल्क माफ किए जाने चाहिए। सरकार को चाहिए कि कारोबारियों को न्यूनतम ब्याज पर ऋण मुहैया करवाए जाएं, ताकि वे अपने कारोबार को दोबारा खड़ा कर सकें। इसके अलावा जो दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं, उन्हें आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
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बिजली, पानी और ब्याज माफ करे सरकार : चैंबर
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के प्रधान अरुण गुप्ता ने कहा कि 2020 में कोविड के दौरान तीन माह तक पूरी तरह से प्रतिष्ठान बंद रहने से कारोबार चौपट हो गया। प्रधानमंत्री की अपील पर कारोबारियों ने अपने मुलाजिमों को समय पर वेतन दिया, लेकिन उनके बदले उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया। बैंकों से ली लिमिट पर ब्याज में कोई राहत नहीं दी गई है। कोविड अवधि के दौरान बैंक ब्याज को पूरी तरह से माफ किया जाए। इसके अलावा बिजली और पानी के शुल्क पूरी तरह से माफ किए जाने चाहिए। सरकार को कारोबारियों के लिए कोई विशेष पैकेज लाना चाहिए।
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बैंक लोन के ब्याज ने ही बढ़ा
दिया 500 करोड़ का बोझ
चैंबर आफ ट्रेडर्स फेडरेशन के प्रधान नीरज आनंद कहते हैं कि कारोबारियों पर सिर्फ ब्याज को ही लेकर 400-500 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ बढ़ा है। सरकार ने बैंक ब्याज पर कुछ रियायत दी, लेकिन कोविड अवधि में जब सब कुछ बंद ही रहा तो कारोबारी कैसे ब्याज दर अदा कर सकते हैं। कोविड अवधि के दौरान बैंक ऋणों पर ब्याज को पूरी तरह से माफ करना चाहिए। बाजार में कारोबारियों के पास नकद की समस्या इसलिए भी आई है कि जम्मू-कश्मीर के विभिन्न विभागों में करीब 600 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया है। कारोबारियों और उद्योगपतियों ने बाजार से सामान उठाकर विभागों को सप्लाई किया है, जिसका भुगतान अटक गया है।
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कारोबारियों को उचित पैकेज दे सरकार
लिंक रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि कोरोना को लेकर कारोबारी फिर दहशत में हैं। सरकार को कारोबारियों को राहत देने के लिए उचित पैकेज लाना चाहिए। खासतौर पर बैंकों की लिमिट को लेकर ब्याज पर अधिक राहत दी जानी चाहिए। पिछले साल जैसे हालात बन रहे हैं, हालांकि कोरोना को लेकर कारोबारियों के साथ ग्राहकों को पूरी तरह से एहतियात बरतनी चाहिए।
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होटल व्यवसाय 90 फीसदी प्रभावित
आल जम्मू होटल एंड लॉजेस एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने कहा कि कोविड और अनलॉक में भी होटल व्यवसाय सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। पिछले एक साल से जम्मू में ही 300 से अधिक होटल 90 फीसदी खाली चल रहे हैं। हालांकि अभी कुछ पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर की ओर कदम बढ़ाए थे, लेकिन दोबारा कोरोना को देखते हुए होटल व्यवसाय पर मंदी का संकट मंडरा रहा है। उन्होंने मांग की कि होटल व्यवसाय को उद्योग की तर्ज पर राहत और प्रोत्साहन दिया जाए। उन्हें कामर्शियल बिजली के बिल भेजे जाते हैं, जबकि उद्योगों को इसमें राहत दी गई है। इसी तरह अन्य राहत भी दी जाएं।
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कारोबार को दोबारा खड़ा करने की चुनौती
कनक मंडी ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान अनूप मित्तल ने कहा कि कोविड अवधि के दौरान सभी तरह के कारोबारियों पर शुल्क माफ किए जाने चाहिए। सरकार को चाहिए कि कारोबारियों को न्यूनतम ब्याज पर ऋण मुहैया करवाए जाएं, ताकि वे अपने कारोबार को दोबारा खड़ा कर सकें। इसके अलावा जो दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं, उन्हें आर्थिक मुआवजा दिया जाए।