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भविष्य की तैयारी : दुश्मन की तोपों से बचाएंगे खास बंकर, कठुआ मॉडल पर 600 बनेंगे; लगेगा केंद्रीकृत अलर्ट सिस्टम

Wed, 14 May 2025 06:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा साहिल खजूरिया, कठुआ
साहिल खजूरिया, कठुआ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 14 May 2025 06:49 AM IST
सार

दुश्मन की तोपों के खामोश होते ही आगे की सुरक्षा और बचाव की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। सीमावर्ती इलाकों में ग्रामीणों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए छह सौ और आधुनिक बंकर बनाए जाएंगे।

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Preparation for the future: Special bunkers will protect us from enemy guns
कठुआ के ग्रामीण इलाके में बनाया गया एक बंकर... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुश्मन की तोपों के खामोश होते ही आगे की सुरक्षा और बचाव की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। सीमावर्ती इलाकों में ग्रामीणों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए छह सौ और आधुनिक बंकर बनाए जाएंगे।

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ये बंकर कठुआ मॉडल पर बनाए जाएंगे। यही नहीं कठुआ जिले में केंद्रीकृत अलर्ट सिस्टम भी तैयार होगा। दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों से जितना जान-माल का नुकसान नहीं पहुंचा, उससे ज्यादा नुकसान दुश्मन की आर्टिलरी से पहुंचा। 
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  दुश्मन ने नापाक हरकत करते हुए रिहायशी इलाकों पर गोले बरसाए। इससे मिले सबक के मद्देनजर आगे की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हीरानगर पहुंचे केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को इसकी घोषणा भी की। 
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एक कमरे वाले फ्लैट की तरह बंकर...जरूरत की हर सुविधा 
पहले के दौर में ट्रेंच या सामुदायिक बंकर की ही सुविधा होती थी। कठुआ पूरे देश में पहला जिला है, जहां सबसे पहले आधुनिक बंकर बनाए गए। ये बंकर एक परिवार की जरूरतों के हिसाब से बनाए जाते हैं।

मॉडल की बात करें तो ये एक कमरे वाले फ्लैट की तरह होते हैं, जिनमें सभी जरूरी सुविधाएं होती हैं। ऐसे दो हजार बंकर सीमावर्ती इलाके में बनाए गए थे। इन बंकरों में पाकिस्तान की गोलाबारी के दौरान चार-पांच दिनों तक परिवार रहे। इनमें रहने वाले परिवार बताते हैं कि गोलाबारी के दौरान वे बिना किसी असुविधा के इनमें रह सके।

डीसी कार्यालय कठुआ में एक केंद्रीकृत अलर्ट सिस्टम लगाया जा रहा है। इस केंद्रीकृत अलर्ट सिस्टम से जगह-जगह लगे सायरन जोड़ दिए जाएंगे। डीसी कार्यालय से बटन दबते ही अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों तक सायरन बजने लगेगा।

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