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विपक्ष की सियासत: जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में इंडिया गठबंधन पर संकट, अब नेशनल कांफ्रेंस ने तरेरी आंखें

Thu, 08 Feb 2024 12:58 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Thu, 08 Feb 2024 12:58 PM IST
सार

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सीट-बंटवारे पर (इंडिया गठबंधन के भीतर) अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। कांग्रेस बातचीत के लिए तैयार है और वे चाहते हैं कि हम उनसे बात करें।

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omar abudullah on Crisis on India alliance in Jammu Kashmir and Ladakh
Nc Leader Omar Abdullah - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में भी इंडिया गठबंधन पर संकट खड़ा हो गया है। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने आंखें तरेरते हुए कहा कि दोनों केंद्र शासित प्रदेश में भाजपा के कब्जे वाली केवल तीन सीटों पर ही गठबंधन से बात होगी। बाकी की तीन सीटें पहले ही नेकां के पास हैं। भाजपा के कब्जे वाली जम्मू, उधमपुर और लद्दाख सीट को वापस पाना है। 

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उमर ने कहा, सीट-बंटवारे पर (इंडिया गठबंधन के भीतर) अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। कांग्रेस बातचीत के लिए तैयार है और वे चाहते हैं कि हम उनसे बात करें। आने वाले दिनों में विशेष रूप से तीन सीटों के बारे में चर्चा होगी। पिछले चुनाव में हमने कश्मीर की सभी तीन संसदीय सीटें - श्रीनगर, बारामूला और अनंतनाग जीती थीं। महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। 
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इस पर उमर ने कहा कि नेकां पहले भी जम्मू, उधमपुर और लद्दाख निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ चुकी है। हमने जम्मू सीट एक बार और लद्दाख सीट एक से अधिक बार जीती है। हम बैठेंगे और चर्चा करेंगे कि कौन सा फॉर्मूला अपनाना चाहिए, ताकि उन सीटों को वापस पा सकें, जो वर्तमान में भाजपा के पास हैं। सीटों की लड़ाई इंडिया गठबंधन के भीतर नहीं है। लड़ाई उन सीटों को वापस लेने की है, जो भाजपा के पास हैं। चूंकि तीन सीटें इंडिया गठबंधन के पास हैं, इसलिए मुझे उनके साथ चर्चा करने की जरूरत नहीं है।

जम्मू-कश्मीर में संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की संभावना के बारे में उमर ने कहा कि भाजपा के पास प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने की हिम्मत नहीं है। अनुच्छेद 370 निरस्त करने जैसे कई काम करने के बावजूद वे जनता का सामना नहीं कर सकते। परिसीमन के माध्यम से अपनी इच्छा के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से बनाना, सभी कानूनों और आरक्षण व्यवस्था को बदला गया है। 

जम्मू-कश्मीर में बेहतर स्थिति और बड़े पैमाने पर विकास के भाजपा के दावों पर उमर ने कहा, सीमावर्ती जिलों राजोरी और पुंछ की स्थिति सबके सामने है। मुझे वहां (आज) जाने की अनुमति नहीं दी गई। अगर स्थिति अच्छी है, तो मेरे कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने का क्या कारण है। दोनों जिलों में आतंकवाद पनपा, जवान बलिदान हुए। कश्मीर में पिछले दो वर्षों में अल्पसंख्यकों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया गया। 

वे कह रहे हैं कि आतंकवाद कम हो गया है, लेकिन हमें जमीन पर ऐसा नहीं दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 2010 में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को छोड़कर उनके शासन के दौरान विशेषकर 2011, 2012 और 2013 में स्थिति काफी बेहतर थी, जो स्थिति में सुधार की बात कर रहे हैं, वे हमें जमीन पर इसका असर दिखाएं। 




उमर बोले, राजोरी नहीं जाने दिया, घर के बाहर ताला लगा दिया

पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने पर राजनीति चरम पर है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को राजोरी जिले में जाने की अनुमति न देने पर उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके घर के गेट पर पुलिस ने ताला लगा दिया है। 

उन्हें सात फरवरी को राजोरी के सुंदरबनी में एक सम्मेलन में हिस्सा लेना था, लेकिन जाने की अनुमति नहीं दी गई। यह पहली बार नहीं हुआ। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आएंगे, मुझे यकीन है कि इस तरह के प्रतिबंधों में तेजी आएगी। कानून-व्यवस्था की स्थिति के बहाने बुधवार सुबह से मेरे घर के दरवाजे बंद कर दिए गए। मेरा राजोरी जाने का दौरा पहले से प्रस्तावित था। मुझे कार्यालय से घर तक ले जाया गया और साथ एक डीएसपी भी रहे। जैसा किसी अपराधी को ले जाया जाता है। लोकतंत्र को जम्मू-कश्मीर तक पहुंचने की अनुमति नहीं है। 

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