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विशेषज्ञों से बादल फटने की आशंका वाले क्षेत्रों की लेंगे रिपोर्ट : सीएम
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कहा- चिशोती में जान का बहुत नुकसान हुआ, बड़े स्तर पर चल रहे बचाव कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि किश्तवाड़ के चिशोती गांव में बादल फटने से पैदा हुए हालात सबके सामने हैं। अब हम विशेषज्ञों को नियुक्त कर उनसे रिपोर्ट लेंगे कि कौन-कौन से ऐसे इलाके हैं जहां सबसे ज्यादा खतरा है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।
एसकेआईसीसी में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी पर सेमिनार के बाद सीएम ने कहा कि कुछ महीने पहले रामबन में बादल फटा था। वहां माल का नुकसान ज्यादा हुआ था, जान का कम। किश्तवाड़ में जान का नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है। इस तरह के हालात फिर से न बनें और अगर बनते हैं तो नुकसान कम से कम हो, इसके लिए विशेषज्ञ नियुक्त कर उनसे रिपोर्ट ली जाएगी। उन्होंने कहा कि चिशोती में बड़े स्तर पर बचाव कार्य जारी हैं।
लापता लोगों के जीवित होने की उम्मीद बहुत कम
सीएम ने कहा कि चिशोती त्रासदी के बाद से अब करीब 70 लोग लापता हैं। दबे लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद बहुत कम है। फिलहाल बचाव कार्य जारी है। हमारी कोशिश है कि शवों को ढूंढकर उनके परिजनों को सौंपें, ताकि वे उनका अंतिम संस्कार कर सकें। इसके बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों की मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि चिशोती के दौरे के दौरान लोगों ने मेरे सामने कुछ मांगें रखी थीं, जितना हो सकेगा हम करेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि किश्तवाड़ के चिशोती गांव में बादल फटने से पैदा हुए हालात सबके सामने हैं। अब हम विशेषज्ञों को नियुक्त कर उनसे रिपोर्ट लेंगे कि कौन-कौन से ऐसे इलाके हैं जहां सबसे ज्यादा खतरा है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।
एसकेआईसीसी में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी पर सेमिनार के बाद सीएम ने कहा कि कुछ महीने पहले रामबन में बादल फटा था। वहां माल का नुकसान ज्यादा हुआ था, जान का कम। किश्तवाड़ में जान का नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है। इस तरह के हालात फिर से न बनें और अगर बनते हैं तो नुकसान कम से कम हो, इसके लिए विशेषज्ञ नियुक्त कर उनसे रिपोर्ट ली जाएगी। उन्होंने कहा कि चिशोती में बड़े स्तर पर बचाव कार्य जारी हैं।
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लापता लोगों के जीवित होने की उम्मीद बहुत कम
सीएम ने कहा कि चिशोती त्रासदी के बाद से अब करीब 70 लोग लापता हैं। दबे लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद बहुत कम है। फिलहाल बचाव कार्य जारी है। हमारी कोशिश है कि शवों को ढूंढकर उनके परिजनों को सौंपें, ताकि वे उनका अंतिम संस्कार कर सकें। इसके बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों की मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि चिशोती के दौरे के दौरान लोगों ने मेरे सामने कुछ मांगें रखी थीं, जितना हो सकेगा हम करेंगे।
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