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डोगरी के विकास में ईमानदारी की कमी रही- डॉ. सिंह
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जम्मू। पीएमओ में मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू संभाग में डोगरी का विकास न होने के लिए कहीं न कहीं ईमानदारी की कमी थी। जो लोग डोगरी को प्रोत्साहन देने की जिम्मेदारी निभाने की बात कहते हैं उनके घर में बच्चे अंग्रेजी बोल रहे हैं। उन्हें डोगरी के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है। डॉ. सिंह एक डोगरी चैनल में साक्षात्कार के दौरान बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि उन्होंने डोगरी को आठवें शेड्यूल के लिए संघर्ष में अपना योगदान दिया। जम्मू-कश्मीर में डोगरी बुलेटन दो तीन माह बंद रहा, लेकिन डोगरी के लिए बातें करने वाले किसी डोगरी नेता, साहित्यकार व अन्य किसी वर्ग ने आवाज नहीं उठाई। उन्हें एक दिन रात्रि दस बजे पहचान वाले दो युवकों ने फोन कर आकाशवाणी पर डोगरी की खबरें बंद होने की सूचना दी, जिसके बाद इसे तत्काल बहाल कराया गया। डोगरी पर सिर्फ राजनीति की जाती रही है। उन्होंने कहा कि देश में जहां भी क्षेत्रीय भाषाओं का विस्तार हुआ है वहां के लोगों ने अपने बच्चों और युवा पीढ़ी को मातृ भाषा से जोड़ा है। उन्होंने इस भाषा को अपनाने के लिए लग्न पैदा की है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का आखिरी अध्याय है। आतंकी हताश होकर साफ्ट टारगेट लोगों को निशाना बना रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में आतंकवाद का पूरी तरह से सफाया हो गया है। कश्मीर में अलगाववादियों का भी पर्दाफाश हुआ था, वे सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए राजनीति कर रहे थे। मजबूत भाजपा के राजनीतिक नेतृत्व में कोरोना काल में भी काम रुके नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि उन्होंने डोगरी को आठवें शेड्यूल के लिए संघर्ष में अपना योगदान दिया। जम्मू-कश्मीर में डोगरी बुलेटन दो तीन माह बंद रहा, लेकिन डोगरी के लिए बातें करने वाले किसी डोगरी नेता, साहित्यकार व अन्य किसी वर्ग ने आवाज नहीं उठाई। उन्हें एक दिन रात्रि दस बजे पहचान वाले दो युवकों ने फोन कर आकाशवाणी पर डोगरी की खबरें बंद होने की सूचना दी, जिसके बाद इसे तत्काल बहाल कराया गया। डोगरी पर सिर्फ राजनीति की जाती रही है। उन्होंने कहा कि देश में जहां भी क्षेत्रीय भाषाओं का विस्तार हुआ है वहां के लोगों ने अपने बच्चों और युवा पीढ़ी को मातृ भाषा से जोड़ा है। उन्होंने इस भाषा को अपनाने के लिए लग्न पैदा की है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का आखिरी अध्याय है। आतंकी हताश होकर साफ्ट टारगेट लोगों को निशाना बना रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में आतंकवाद का पूरी तरह से सफाया हो गया है। कश्मीर में अलगाववादियों का भी पर्दाफाश हुआ था, वे सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए राजनीति कर रहे थे। मजबूत भाजपा के राजनीतिक नेतृत्व में कोरोना काल में भी काम रुके नहीं हैं।
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