स्मरणोत्सव दिवस: शहीद पुलिस जवानों को दी गई श्रद्धांजलि, LG बोले- देश की निस्वार्थ सेवा के लिए हमेश किए जाएंगे
डीजीपी दिलबाग सिंह ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, उनके परिवारों के लिए संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की कमर तोड़ने में काफी हद तक सफल रही है।
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पुलिस का राष्ट्रीय स्मरणोत्सव दिवस 21 अक्तूबर को मनाया जा रहा है। इस मौके पर शहर में दो स्थानों पर तीन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पहला कार्यक्रम सुबह 8.45 मिनट पर रेलवे स्टेशन स्थित शहीदी स्थल पर किया गया। यहां डीजीपी समेत तमाम अधिकारी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सुबह 9.30 बजे गुलशन मैदान में परेड आयोजित की गई और मुख्य कार्यक्रम हुआ। वहीं, देर शाम 6.30 बजे रेलवे स्टेशन स्थित शहीदी स्थल पर मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि दी जाएगी।
पुलिस स्मरणोत्सव दिवस पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, 'मैं कर्तव्य के प्रति अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके बलिदान और राष्ट्र के लिए निस्वार्थ सेवा को हमेशा याद किया जाएगा।'
वहीं, डीजीपी दिलबाग सिंह ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, उनके परिवारों के लिए संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की कमर तोड़ने में काफी हद तक सफल रही है। ड्यूटी के दौरान पुलिस के जवानों ने अमूल्य बलिदान देकर जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति वापस लाने का प्रयास किया है। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है।1989 के बाद से ही पाकिस्तान ने आतंकियों को प्रदेश में भेजना शुरू किया और यह सिलसिला आज भी जारी है। तब से अब तक देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा के लिए 1604 पुलिसकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है।
पुलिस शहीदों की लंबी सूची में एक उप महानिरीक्षक, एक पुलिस अधीक्षक, 22 पुलिस उपाधीक्षक, 28 निरीक्षक, 39 उप निरीक्षक, 69 सहायक उप निरीक्षक, 150 हेड कांस्टेबल, 189 वरिष्ठ ग्रेड कांस्टेबल, 563 कांस्टेबल, 516 विशेष पुलिस अधिकारी और 26 अनुयायी शामिल हैं।
धमकियों ने और किया मजबूत
तीन दशक से जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों और उनके परिवारों को धमकियां मिलती रही हैं। हालांकि इन धमकियों ने उन्हें और मजबूत किया है। उनके साहस ने आने वाली पीढ़ियों को उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित किया है। आतंक से लड़ने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर आपदाओं में पीड़ितों को सहायता करने तक, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लोगों और उनकी संपत्ति की सेवा और सुरक्षा के लिए अपने समर्पण को साबित किया है।
समर्पण, ईमानदारी और निष्ठा ने किया गौरवान्वित
जम्मू-कश्मीर पुलिस के समर्पण, ईमानदारी और निष्ठा ने भारत को गौरवान्वित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उप राज्यपाल मनोज सिन्हा और अन्य नेताओं ने कई अवसरों पर जेके पुलिस के बलिदानों और उपलब्धियों की सराहना की है। जेकेपी ने राष्ट्र के लिए जो सेवा की है, उसे मान्यता देते हुए इसे शौर्य के लिए एक अशोक चक्र, 2 कीर्ति चक्र, 18 शौर्य चक्र, 1672 राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक और 1822 जम्मू-कश्मीर पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है।