फारूक अब्दुल्ला ने पीओके को बता दिया पाक का हिस्सा
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दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को इस आशय का प्रस्ताव भी दिया था। कहा कि जब वाजपेयी लाहौर गए थे तो उन्होंने मुशर्रफ को यह प्रस्ताव दिया था।
डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि वाजपेयी ने खुद उन्हें इसकी जानकारी दी थी। प्रस्ताव में नियंत्रण रेखा को सुधार लेने की भी बात थी ताकि लोग आसानी से एक देश से दूसरे देश आ जा सकें और व्यापार का भी विकास हो सके।
लेकिन, मुशर्रफ इसके लिए तैयार नहीं हुए। फारूक ने कहा कि आज वे इसे स्वीकार करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाना होगा। डॉ. अब्दुल्ला एक समारोह के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।
डॉ. अब्दुल्ला से जब यह पूछा गया कि पीओके के लोग भारत में शामिल होने की मांग कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यह संभव नहीं है। दोनों देश अपने हिस्से पर नियंत्रण जारी रखेंगे।
पीओके पाकिस्तान का हिस्सा है और उसका हिस्सा रहेगा। जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है और रहेगा। इसे समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए बातचीत ही एकमात्र विकल्प है।
इसी के जरिये भारत और पाकिस्तान इस समस्या का कोई हल निकाल सकते हैं। कहा कि पिछले कई वर्षों से हम यह कहते आ रहे हैं कि पीओके भारत का हिस्सा है, लेकिन इस दिशा में अब तक हमने क्या किया।
क्या हमने उसे वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच युद्ध कोई समाधान नहीं है। हमने पहले ही तीन युद्ध लड़े हैं। इससे किसी को कुछ हासिल नहीं हो सकता, सिवाय इसके कि दोनों ओर के निरीह लोग मारे जाएंगे।
आमिर का किया बचाव
फिल्म अभिनेता आमिर खान के बचाव में उतरते हुए फारूक ने कहा कि यह विवाद शुद्ध रूप से दुष्प्रचार है। आमिर ने कभी नहीं कहा कि वह देश छोड़कर जाना चाहते हैं।
मैं उनके साथ बैठा था और उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा। आमिर ने यह कहा कि भारत मेरा देश है। यहां की धरती पर उन्होंने जन्म लिया है और यहीं की धरती पर मरना है।
कोई ऐसा कारण नहीं है कि आमिर को भारत छोड़ना पडे़। उन्होंने मीडिया पर दुष्प्रचार का आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय मुसलमानों को भारतीय होने का गर्व है और कोई भी पाकिस्तान नहीं जाना चाहता।
आपको यह सवाल असम के राज्यपाल से पूछना चाहिए जो वहां बैठकर इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पैदाइश के दौरान ईश्वर किसी से यह नहीं पूछता कि वह कहां पैदा होना चाहता है।
दरअसल इन दिनों कुछ लोग समुदायों के बीच वैमनस्यता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। फारूक ने कहा कि देश की स्थिति ऐसी है कि भारत और पाकिस्तान को क्रिकेट सीरीज के लिए किसी तीसरे देश की तलाश करनी पड़ी। यह गंभीर बात है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने टीवी चैनलों की रिपोर्टों पर आश्चर्य जताया है। ट्विटर पर उमर ने लिखा कि मैं आश्चर्यचकित हूं कि चैनल मेरे पिता के पीओके संबंधी विचारों को इतना हाईलाइट कर रहे हैं जैसा कि उन्होंने पहले कभी नहीं कहा हो।
फारूक के बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए रियासत के डिप्टी सीएम डॉ. निर्मल सिंह ने कहा कि पीओके के संबंध में उनका बयान संविधान के विपरीत है और देश इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा।
1994 में संसद ने सर्वसम्मति से इस आशय का प्रस्ताव पास किया है। पीओके को वापस लेना है। यदि कोई इस संबंध में कहता है तो वह यह समझ ले कि यह संविधान के विपरीत है।