J&K से खेल प्रतिभा का पलायन, दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों का रुख कर रहे राज्य के धुरंधर
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जम्मू कश्मीर से खेल प्रतिभा का पलायन हो रहा है। राज्य के विश्वविद्यालयों में कोई उचित खेल नीति न होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर के धुरंधर दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप में राज्य के युवा दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करके उनकी झोली में पदक डाल रहे हैं। ऐसी खेल नीतियों से सरकार भलीभांति वाकिफ है, लेकिन कुछ खास नहीं किया गया है।
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में हाल ही में हुई आल इंडिया अंतर यूनिवर्सिटी जिमनास्टिक चैंपियनशिप में राज्य से कामनवेल्थ खिलाड़ी वंडर गर्ल मिताली डोगरा और पलक कौर ने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए ग्यारह पदक लाए। इसमें छह स्वर्ण और पांच रजत पदक शामिल थे।
दोनों ही धुरंधरों ने स्थानीय विश्वविद्यालय से कोई प्रोत्साहन न मिलने पर यह कदम उठाया है। वर्ष 2014 में दोनों जिमनास्ट ने कामन वेल्थ का सफर तय करके देश का प्रतिनिधित्व करने के साथ रियासत का नाम रोशन किया था। दोनों के नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक हैं।
स्थानीय विश्वविद्यालय में कोई प्रोत्साहन नहीं मिलने से पलायन
स्टेट और शेर-ए-कश्मीर अवार्ड से सम्मानित मिताली ने कहा कि उन्हें स्थानीय विश्वविद्यालय में कोई प्रोत्साहन नहीं मिलने से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। वर्ष 2007-2008 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में एक साथ पांच स्वर्ण पदक लेकर इतिहास रचने वाली मिताली ने कहा कि यह परिस्थितियां रियासत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
अंतरराष्ट्रीय जिमनास्ट पलक कौर ने कहा कि मेहनत के बावजूद राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उच्च शिक्षा विभाग में प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है, लेकिन दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में खिलाड़ियों के लिए ढेर सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्हें वहां छात्रवृत्ति के साथ पदक लाने पर उचित इनाम, अकादमिक गतिविधियों में राहत आदि सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।
फेंसिंग में अंतरराष्ट्रीय फेंसर मोहम्मद तारिक, जावेद अहमद, संग्राम सिंह, पंकज शर्मा, विशाल थापर आदि दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों के लिए खेल रहे हैं। जूडो में भी दानिश, श्वेता आदि खिलाड़ियों ने ऐसा ही किया है। कश्मीर से अंतरराष्ट्रीय साइकिलिस्ट अकबर भी मायूस होकर दूसरे राज्य के विश्वविद्यालय में चले गए। अंतरराष्ट्रीय फेंसर रशीद अहमद का कहना है कि विश्वविद्यालयों में खेल नीति पर काम होना चाहिए, जिससे राज्य से खेल प्रतिभा के पलायन को रोका जा सके।