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हवाई किले ने किया सपनों को चकनाचूर
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 07 Sep 2014 11:08 PM IST
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नटरंग के संडे थियेटर के तहत नटरंग स्टूडियो में रविवार को के एम मिश्रा के लिखे और सुमित शर्मा के निर्देशन में ‘हवा हवाई’ नाटक का मंचन किया। हवा हवाई नाटक में कलाकारों ने बड़ी ही खूबसूरती और व्यंग्य के साथ अपने अभिनय को पेश किया। कलाकारों ने अपने संवाद और अभिनय के साथ स्टूडियो में बैठे दर्शकों को हंसने के लिए मजबूर कर दिया।
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इस नाटक में एक ऐसे युवा की कहानी थी जो छोटी सी बातों को गंभीरता के साथ लेकर खुश होकर बड़े-बड़े सपने देखता है। नाटक की कहानी मध्यम वर्ग से संबंध रखने वाले सुरेश के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक छोटी सी नौकरी करता है, जिससे उसके और उसके परिवार का बमुश्किल से गुजारा होता था। वहीं कोई भी या छोटी सी बात को लेकर वह अपने दिमाग में कई तरह के सपने बुुनने लगता था।
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नाटक की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है तो घटनाक्रम बदलता है। एक दिन सुरेश अखबार में एक खबर पढ़ता है, जिसमें लिखा होता है कि वैज्ञानिक एक ऐसे हवाई जहाज का निर्माण कर रहे हैं, जो अब हर एक आम आदमी के बजट होगा। इस खबर के पढ़ते ही सुरेश खुशी से फूले नहीं समाता है और वह आंखें खोलकर सपने देखकर हवाई किले बनाने लगता है। वह अपने सपने में देखता है कि परिवार के साथ हवाई जहाज का सफर कर रहा है।
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वहीं उसके दोस्त और रिश्तेदार उससे ईर्ष्या कर रहे हैं। इस खबर को पढ़ते ही सुरेश बड़े ही जोश और उत्साह के साथ योजना बनाता है कि वह अपना एकमात्र स्कूटर बेचकर बैंक से कुछ लोन ले लेगा, जिससे वह हवाई जहाज खरीदेगा। इस खबर के बारे में सुरेश अपने परिवार और दोस्त विनोद को भी बताता है।
कहानी में तब अचानक ही व्यंग्य और खिल्ली भरा अंत होता है, जब सुरेश अखबार में छपी खबर के अंत को पढ़ता है, जिसमें लिखा होता है कि वैज्ञानिक इस तरह के हवाई जहाज का निर्माण आने वाले चालीस वर्षों के दौरान पूरा करेंगे। इस तरह से अपना मजाक बनता देख सुरेश को एहसास होता है कि हमें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए और इस तरह से हवाई किले नहीं बनाना चाहिएं।