फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   pil to make rohingya out from the state of jammu and kashmir

J&K: रोहिंग्याओं को राज्य से बाहर करने के लिए जनहित याचिका

Thu, 02 Feb 2017 04:46 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 02 Feb 2017 04:46 PM IST
विज्ञापन
pil to make rohingya out from the state of jammu and kashmir
जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस - फोटो : demo pic

रोहिंग्याओं समेत बांग्लादेश और म्यांमार के अवैध अप्रवासियों को जम्मू-कश्मीर से बाहर करने की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्यों को नोटिस जारी किया है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट (जम्मू विंग) में चीफ जस्टिस एनपाल वसंथाकुमार और ताशी राबस्तन की पीठ ने डिप्टी एडवोकेट जनरल रमण शर्मा के माध्यम से नोटिस जारी करते हुए कहा, दो सप्ताह में इस मामले पर पक्ष रखा जाए।

विज्ञापन


याची और भाजपा लीगल सेल के सदस्य एडवोकेट हुनर गुप्ता ने अदालत में याचिका पेश कर म्यांमार और बांग्लादेश के अनाधिकृत अप्रवासियों को राज्य से बाहर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। एडवोकेट गुप्ता ने रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में जांच करवाने की मांग की।
विज्ञापन


खंडपीठ के समक्ष दलीलें पेश करते हुए एडवोकेट सुनील सेठी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोग अवैध अप्रवासियों के तौर पर जम्मू-कश्मीर में बस गए हैं। सरकार के मुताबिक म्यांमार और बांग्लादेश से आए प्रवासियों की संख्या 13400 है, जबकि हकीकत में इनकी संख्या इससे कहीं अधिक है। बताया गया कि वर्ष 1982 में म्यांमार सरकार ने रोहिंग्याओं को अवैध अप्रवासी घोषित कर दिया था, जिसके बाद से संबंधित आबादी ने बांग्लादेश, थाइलैंड और पाकिस्तान का रुख करना शुरू कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

'तीनों देशों ने अवैध प्रवासियों के दाखिल होने पर लगाई रोक'

pil to make rohingya out from the state of jammu and kashmir
3 देशों नें प्रवेश पर लगाई रोक - फोटो : डेमो फोटो

इन तीनों देशों ने अवैध प्रवासियों के दाखिल होने पर रोक लगा दी, जिसके बाद से ये लोग बांग्लादेश सीमा से भारत में दाखिल होकर जम्मू-कश्मीर का रुख कर रहे हैं। रियासत में 1700 रोहिंग्या परिवार विभिन्न कालोनियों में रह रहे हैं। अधिकृत रूप से इनकी संख्या 1286 परिवार, 5000 सदस्य बताई गई है।

जम्मू-कश्मीर में इन लोगाें को एक साजिश के तहत वन और सरकारी भूमि कब्जाने के लिए बसाया जा रहा है। राज्य के प्राकृतिक स्रोतों का अवैध रूप से दोहन करने समेत तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि रोहिंग्या परिवारों में से कई को राशन कार्ड, आधार कार्ड और यहां तक कि स्थायी नागरिकता प्रमाण पत्र तक जारी हो चुके हैं। राज्य में इनकी आबादी बढ़ने से अलगाववाद और आतंकवाद से प्रेरित गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के प्रबल आसार हैं। ऐसे में जरूरी होगा कि जल्द से जल्द इन्हें रियासत से बाहर भेजने की व्यवस्था की जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed