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पीएसए पर जम्मू हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Thu, 03 Dec 2015 12:29 AM IST
Updated Thu, 03 Dec 2015 12:29 AM IST
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person detained under PSA can’t continue in armed force: jk high court

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कोई शख्स राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होता है और सीमा सुरक्षा बल में तैनाती के दौरान वह जेएंडके पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत गिरफ्तार किया जाता है तो वह फोर्स में नियमित रूप से काम करने का अधिकार नहीं रखता।

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उक्त फैसला मुनीर हुसैन की याचिका पर सुनाया गया, जिसने अवैध रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप में उसके खिलाफ फैसले को चुनौती दी थी। पीएसए के तहत गिरफ्तार होने के कारण याचिकाकर्ता ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो पाया था। उसकी ओर से गिरफ्तारी के आदेश को चुनौती नहीं दी गई और बंदी की अवधि पूरी होने के बाद रिहा हुआ।
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चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाला शख्स यदि पीएसए के तहत बंदी बनाया गया तो वह बीएसएफ जैसी अनुशासित फोर्स में ड्यूटी करने का पात्र नहीं हो सकता। क्योंकि देश की अखंडता ज्यादा महत्वपूर्ण है।
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नियुक्ति के लिए उसके आचरण की जांच करना जरूरी

person detained under PSA can’t continue in armed force: jk high court

कोर्ट ने कहा कि पुलिस कर्मी की नियुक्ति से पहले भी उसका शख्स का आचरण बेहतर होना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में भी आरोपी होता है तो उसकी फिर से नियुक्ति के लिए उसके आचरण की जांच करना जरूरी है।

चूंकि पुलिस एक अनुशासित विभाग है और इसमें व्यक्ति को बेदाग होना जरूरी है। जवान को समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। आपराधिक आचरण वाला इस नौकरी के पात्र नहीं हो सकता।

अदालत ने कहा कि वर्तमान केस में स्क्रीनिंग कमेटी का फैसला महत्वपूर्ण है। मुलाजिम अधिकारों का दुरुपयोग भी करते पाए गए हैं। ऐसे में समाज से जुड़े पुलिस महकमे में भी पद का दुरुपयोग होने की आशंका बढ़ती है।

ऐसे में स्क्रीनिंग कमेटी का महत्व बढ़ता है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई शख्स अपने अधिकार को नष्ट करता है तो वह पुलिस में रहने का अधिकार नहीं रखता। तमाम बातें ध्यान में रखते कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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