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कोरोना पर जीत दर्ज कर चुके लोग हो रहे सामाजिक भेदभाव का शिकार, दांत दर्द का इलाज करने से डॉक्टर ने किया इनकार

Tue, 12 May 2020 02:44 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 12 May 2020 02:44 AM IST
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People who won the corona battle now they face social discrimination in kashmir
कोरोना वायरस - फोटो : PTI

जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण से मुक्त होने वाले लोगों की उच्च दर भले ही 45 फीसदी हो, लेकिन कोरोना पर जीत दर्ज कर चुके कुछ लोग अब सामाजिक भेदभाव के शिकार हो रहे हैं। लोग उनसे संपर्क बनाने में परहेज कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के कुल 861 मामलों में से 383 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं जो पूरे देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टॉप पर है। 

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इसके बावजूद आम लोगों के मन में कोरोना को लेकर जो भय है उसका खामियाजा यहां के स्वस्थ हो चुके लोगों को भी भगतना पड़ रहा है। स्वस्थ हुए मरीजों में से एक ने कहा कि वह दांत के दर्द से पीड़ित है और इलाज के लिए दंत चिकित्सक के पास गया था लेकिन चिकित्सक ने उसे देखने से मना कर दिया। इस मरीज को स्वस्थ होने के बाद यहां एक अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। 
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उन्होंने कहा, पिछले कुछ दिन से मुझे दांत में दर्द हो रहा था। मुझे नहीं पता कि मैं दंत चिकित्सक को कैसे विश्वास दिलाऊं कि मैं कोविड-19 से मुक्त हो चुका हूं। एक और  मरीज ने कहा कि उसे स्वास्थ्य अधिकारियों से कुछ दस्तावेजी प्रमाण की आवश्यकता हो सकती है जो यह प्रमाणित करे कि वह इस वायरस से मुक्त है। क्योंकि मैंने हाल ही में एक गैस सिलेंडर खरीदा है। जैसे ही उस लड़के को पता चला कि मैं पहले कोविड-19 से संक्रमित था, उसने कई मूर्खता पूर्ण सवाल पूछे। 
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उसने यह भी पूछा कि क्या वह उन नोटों को छू सकता है जो मैंने उसे दिए थे? कोरोना वायरस से स्वस्थ हुए एक अन्य मरीज ने कहा कि एक निजी दूरसंचार कंपनी के अधिकारियों ने उसके घर पर ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन लगाने से मना कर दिया। इस तरह की घटनाओं ने कोरोना वायरस से स्वस्थ हुए मरीजों को हताश कर दिया है क्योंकि वे अपनी नियमित गतिविधियों को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। 


-स्वस्थ हो चुके लोगों को सामान्य मानें
इन घटनाओं पर डल गेट में कोविड-19 अस्पताल से जुड़े डॉ. नवीद नजीर शाह ने इस वायरस से स्वस्थ हो चुके लोगों से भेदभाव नहीं किये जाने की अपील की। शाह ने एक ट्वीट में कहा, दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वस्थ हो चुके रोगियों से समाज द्वारा भेदभाव किया जा रहा है और बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया गया है। ऐसे लोगों को सामान्य और स्वस्थ माना जाना चाहिए।

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