मुफ्ती अड़े, कश्मीर में सरकार के गठन टलने के आसार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई सरकार का गठन फिलहाल टलता नजर आ रहा है। पीडीपी अपनी शर्तों से इंच भर भी टस से मस होने को तैयार नहीं है। पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद ने दो टूक कहा है कि वह कश्मीरियों की भावनाओं से कोई समझौता नहीं करेंगे।
मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए मूल मुद्दों की तिलांजलि नहीं दी जा सकती। इस बीच, भाजपा ने संघ परिवार से विवादस्पद मुद्दों पर चर्चा की है। संघ अपने रुख में बदलाव नहीं कर सकता, लेकिन, वह भाजपा के काम में सीधी दखलअंदाजी के मूड में भी नहीं है।
इस बीच भाजपा ने विधान परिषद चुनाव में पीडीपी से तालमेल तोड़कर दबाव बनाया है। फिलहाल सारी कवायद विधान परिषद चुनाव में फिर से तालमेल कायम पर आ टिकी है।
370 पर लिखित करार भाजपा को रास नहीं
बदलते सियासी समीकरणों के कारण रियासत को अभी राज्यपाल शासन में ही रहना पड़ सकता है। विधान परिषद के लिए 2 मार्च को मतदान होने वाला है। तब तक न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति के आसार नहीं दिख रहे हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मुलाकात में भी विवादास्पद मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। पाकिस्तान और हुर्रियत से वार्ता तथा अनुच्छेद 370 पर चुप्पी का लिखित करार भाजपा को रास नहीं आ रहा है।
इसी तरह अफस्पा की वापसी का लिखित समझौता भी भाजपा के लिए मुश्किल होगा। पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा है कि पीडीपी के लिए सरकार गठन से अधिक महत्वपूर्ण कश्मीर के मुद्दे हैं।
अफस्पा वापसी पर पीडीपी अड़ी
पीडीपी की ओर से भाजपा के उस तर्क को खारिज कर दिया गया है जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान से वार्ता का मुद्दा विदेश नीति से जुड़ा है और वह केंद्र सरकार के दायरे में है। इसी तरह हुर्रियत से बातचीत का भी मुद्दा राष्ट्रीय नीतियों से संबंधित है इसलिए जम्मू कश्मीर की राज्य सरकार के गठन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में इसे शामिल कैसे किया जा सकता है।
पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद ने भाजपा के वार्ताकार राम माधव को संदेश भेजा है कि चूंकि ये मुद्दे कश्मीर के आंतरिक मामलों को प्रभावित करते हैं इसलिए इन्हें छोड़ा नहीं जा सकता। एनडीए सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने हुर्रियत से दो बार बातचीत की थी।
इसलिए एनडीए 2 को इन मुद्दों पर मुश्किल पेश नहीं आनी चाहिए। अफस्पा वापसी पर भी पीडीपी अड़ गई है। भाजपा ने चुनाव के क्रम में ही अनुच्छेद 370 का मुद्दा छोड़ दिया था लेकिन इस पर लिखित करार में भाजपा को संकोच है।