{"_id":"7136636a344198ce2f205b2cb1609962","slug":"patients-without-breakfast-since-month-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरीजों को एक महीने से नहीं मिल रहा नाश्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीजों को एक महीने से नहीं मिल रहा नाश्ता
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 03 Jul 2015 12:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में पिछले एक माह से मरीजों को नाश्ता (डाइट) नहीं मिल पाया है। मरीजों के नाश्ते को लेकर सरकार और जीएमसी प्रशासन गंभीर नहीं है। कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे खासकर दूरवर्ती मरीजों को नाश्ते के लिए बाजार का रुख करना पड़ रहा है। इसमें बिना कैंटीन वाले अस्पतालों में मरीजों के साथ तीमारदारों की दिक्कतें बढ़ी हैं।
विज्ञापन
डाइट के लिए ठेकेदारों को करीब पौने दो करोड़ रुपये की देनदारी पर कुछ खास नहीं हो पाया है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार डाइट की बकाया राशि के लिए सरकार को लिखा गया है। फिलहाल लंच और डीनर की सुविधा मरीजों को दी जा रही है। गत एक जून को ठेकेदारों ने जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में एसएमजीएस, सीडी, साइक्रेटरी और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सुबह की डाइट नाश्ते को बंद कर दिया था।
विज्ञापन
नाश्ते में मरीजों को आधा लीटर दूध, चीनी का पाउच और चार ब्रेड पीस की डाइट सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे रोजाना 1100-1200 मरीजों को प्रभावित होना पड़ रहा है। डाइट के लिए देनदारी में सबसे ज्यादा जीएमसी पर बकाया है। दूध पर ही लाखों रुपये की देनदारी न होने पर फैक्ट्री मालिक ने सप्लाई बंद कर दी थी। जीएमसी की इमरजेंसी में पुंछ के मरीज के साथ आए सलीमदीन ने कहा कि अस्पताल में नि:शुल्क मिलने वाली डाइट से मरीजों को काफी राहत मिलती है।
विज्ञापन
इससे आर्थिक तौर पर कमजोर मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में ही डाइट मिल जाती है। लेकिन जिस तरह नाश्ता बंद हुआ है, उससे भविष्य में लंच और डीनर पर भी ताला लग सकता है। इस बीच रेशमघर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नाश्ते के लिए मरीजों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। यहां कैंटीन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, जबकि रोजाना कई सर्जरी को अंजाम दिया जा रहा है।
इंडोर वार्ड भी चल रहे हैं। सीडी अस्पताल में भी कई इंडोर वार्डों में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज चलता है, लेकिन यहां भी कैंटीन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।