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पाक गोलाबारी में घायल 14 महीने की 'परी' लड़ रही मौत से जंग
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:14 PM IST
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पाक गोलाबारी में घायल बच्ची परी
- फोटो : Amar Ujala
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पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल हुई प्रज्ञा भगत (परी) की हालत स्थिर है, लेकिन उसकी जिंदगी अगले 48 घंटे तय करेंगे, जो बेहद नाजुक हैं।
परी का आपरेशन कर उसे नई जिंदगी देने की डाक्टरों ने पूरी कोशिश की है, लेकिन दवाओं के साथ उसे दुआओं की भी जरूरत है। जिंदगी और मौत की इस लड़ाई में परी के लिए सबको दुआ करने की जरूरत है। अमर उजाला परिवार भी परी की जिंदगी की सलामती की मनोकामना करता है।
परी की आयु अभी 14 महीने है। मंगलवार को पाक गोलाबारी में परी अपने माता-पिता के साथ बुरी तरह से घायल हो गई, लेकिन सबसे ज्यादा चोटें परी को आईं। हालांकि उसके पिता राकेश को सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मां सुषमा भी अस्पताल में है।
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परी का आपरेशन कर उसे नई जिंदगी देने की डाक्टरों ने पूरी कोशिश की है, लेकिन दवाओं के साथ उसे दुआओं की भी जरूरत है। जिंदगी और मौत की इस लड़ाई में परी के लिए सबको दुआ करने की जरूरत है। अमर उजाला परिवार भी परी की जिंदगी की सलामती की मनोकामना करता है।
परी की आयु अभी 14 महीने है। मंगलवार को पाक गोलाबारी में परी अपने माता-पिता के साथ बुरी तरह से घायल हो गई, लेकिन सबसे ज्यादा चोटें परी को आईं। हालांकि उसके पिता राकेश को सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मां सुषमा भी अस्पताल में है।
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छर्रे लगने से कई नसें कटीं
ceasefire
- फोटो : Amar Ujala
बुधवार को सुबह 10 बजे परी को आपरेशन थियेटर ले जाया गया। आंखों में आंसू लिए सुषमा ने अपनी बेटी को भेज तो दिया, लेकिन नजरें आपरेशन थियेटर के बाहर ही टिकाई रखीं।
दोपहर 2 बजे परी को आपरेशन थियेटर से बाहर लाया गया और सुषमा के पास लिटा दिया। बेटी को आंखों के सामने सलामत देखकर सुषमा ने राहत ली, लेकिन मासूम बच्ची के कोमल शरीर के हुए आपरेशन को देखकर वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई। आपरेशन में शामिल डाक्टरों का कहना है कि छर्रे लगने से परी के शरीर की कई नसें कट गईं हैं। ये नसें कटने के बाद आपस में जुड़कर इकट्ठी हो गईं।
इसकी वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इन नाड़ियां को ठीक कर दिया गया है। हालत तो स्थिर है, लेकिन अगले 48 घंटे नाजुक हैं। परी को अगले 48 घंटाें तक जिंदगी और मौत की जंग लड़नी है। उसकी मां और अस्पताल में मौजूद हर शख्स उसकी जिंदगी की दुआ कर रहा है। आइए नन्ही परी के लिए दुआ करें।
दोपहर 2 बजे परी को आपरेशन थियेटर से बाहर लाया गया और सुषमा के पास लिटा दिया। बेटी को आंखों के सामने सलामत देखकर सुषमा ने राहत ली, लेकिन मासूम बच्ची के कोमल शरीर के हुए आपरेशन को देखकर वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई। आपरेशन में शामिल डाक्टरों का कहना है कि छर्रे लगने से परी के शरीर की कई नसें कट गईं हैं। ये नसें कटने के बाद आपस में जुड़कर इकट्ठी हो गईं।
इसकी वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इन नाड़ियां को ठीक कर दिया गया है। हालत तो स्थिर है, लेकिन अगले 48 घंटे नाजुक हैं। परी को अगले 48 घंटाें तक जिंदगी और मौत की जंग लड़नी है। उसकी मां और अस्पताल में मौजूद हर शख्स उसकी जिंदगी की दुआ कर रहा है। आइए नन्ही परी के लिए दुआ करें।
मंत्री ने परी का हाल तक नहीं जाना
मां के साथ परी
- फोटो : Amar Ujala
परी के आपरेशन के लिए दस हजार रुपये का सर्जिकल सामान इस्तेमाल हुआ, लेकिन यह सामान परी के परिवार को खुद खरीदना पड़ा। चार घंटे तक चले आपरेशन में आपरेशन करने वाले डाक्टरों के सहयोगी कई बार बाहर आए और परिवार वालों को सामान लाने को कहा।
परी का अस्पताल में मामा और मौसी ही मौजूद थे। उनका कहना था कि जब उन्हें ही सब करना था, तो किसी निजी अस्पताल में चले जाते। इसे लेकर जब स्वास्थ्य मंत्री से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह पैसे रिफंड कर दिए जाएंगे, लेकिन परिवार का कहना था कि यदि उनके पास पैसे नहीं होते तो बच्ची का आपरेशन नहीं होता।
आपरेशन मंगलवार की रात को ही होना था, लेकिन लापरवाही की वजह से सुबह किया गया। परिवार वालों ने बताया कि अस्पताल में आए मंत्री परी का हाल जानने तक नहीं पहुंचे। वह आपरेशन थियेटर के बाहर से होकर ही निकल गए और उसकी मां के पास से गुजर गए। मां का हाल तक नहीं पूछा।
परी का अस्पताल में मामा और मौसी ही मौजूद थे। उनका कहना था कि जब उन्हें ही सब करना था, तो किसी निजी अस्पताल में चले जाते। इसे लेकर जब स्वास्थ्य मंत्री से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह पैसे रिफंड कर दिए जाएंगे, लेकिन परिवार का कहना था कि यदि उनके पास पैसे नहीं होते तो बच्ची का आपरेशन नहीं होता।
आपरेशन मंगलवार की रात को ही होना था, लेकिन लापरवाही की वजह से सुबह किया गया। परिवार वालों ने बताया कि अस्पताल में आए मंत्री परी का हाल जानने तक नहीं पहुंचे। वह आपरेशन थियेटर के बाहर से होकर ही निकल गए और उसकी मां के पास से गुजर गए। मां का हाल तक नहीं पूछा।