फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   param vir chakra captain vikram batra, kargil war

कारगिल गाथा: भीषण गोलाबारी के बीच सप्लाई लेकर पहुंचे विक्रम बत्रा

Thu, 07 Jul 2016 02:57 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 07 Jul 2016 02:57 PM IST
विज्ञापन
param vir chakra captain vikram batra, kargil war
- फोटो : ADGPI

द्रास कारगिल सेक्टर की उल्टी ढलान पर तैनात छोटी सी टुकड़ी का दुश्मन से सामना हो गया। नायब सूबेदार करनैल सिंह और सिपाही सतपाल सिंह टाइगर हिल, चार्ली फीचर, राकी नॉब और ट्रिग हाइट से हो रही जबरदस्त फायरिंग की जद में थे। दोनों ही दुश्मन से आखिर तक लड़ते रहे। 

विज्ञापन


करनैल सिंह और सतपाल सिंह को वीर चक्र का सम्मान दिया गया। उधर प्वाइंट 4875 की चुनौती पर भारतीय जांबाजों ने दुश्मन को असहाय कर दिया था। पांच जुलाई को 13 जैक राइफल ने जो धावा बोला था, उससे दुश्मन की सप्लाई लाइन और बचने के तमाम रास्ते कट चुके थे। 
विज्ञापन


उस पर 8 सिख रेजीमेंट की अतिरिक्त मदद से दुश्मन के मोर्चे पर खलबली मच गई। बौखलाहट में दुश्मन मोर्चों से भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। मरो या मारो की स्थिति को भांपते हुए दुश्मन आर्टीलरी फायर दाग रहा था। ऐसे हालात में साथियों तक मदद पहुंचाना बेहद जोखिम भरा हो गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मेजर विकास वोहरा और कैप्टन विक्रम बत्रा ने तमाम चुनौतियों के बावजूद असलहे की सप्लाई का काम पूरा कर दिया। पांच जुलाई की तरह ही छह जुलाई तक दोनों तरफ से गोलाबारी का दौर जारी रहा। कुछेक चोटियाें को छोड़कर भारतीय जांबाज अधिकांश इलाके पर नियंत्रण हासिल करने में कामयाब हो गए, लेकिन दुश्मन की मौजूदगी से खतरा अभी टला नहीं था। 

शादी के चार माह बाद वतन पर कुर्बान हो गए देवेंद्र सिंह

param vir chakra captain vikram batra, kargil war

कारगिल युद्ध में जान पर खेलने वाले भारतीय सैन्य जवानों का जुनून चरम पर था। दुश्मन से लोहा लेने वालों में शामिल आरएस पुरा के रहने वाले सिख रेजीमेंट के लांस नायक देवेंद्र सिंह ने कारगिल युद्ध में शहादत हासिल की। महज चार महीने पूर्व ही देवेंद्र सिंह ने दपेंद्र कौर से शादी रचाई थी। 

मार्च में शादी करने के बाद अप्रैल में छुट्टी पूरी होने पर देवेंद्र यूनिट में वापस चले गए। दपेंद्र कौर बताती हैं कि नई-नई शादी के बाद पति का यूनिट में लौटना अखर रहा था। उस पर युद्ध छिड़ जाने से उनकी बेचैनी बढ़ गई थी। युद्ध के मोर्चे से उन्होंने अपने स्वास्थ्य की जानकारी दी। 

दो पत्र लिखकर जल्द लौटने का वादा भी किया, लेकिन इसके बाद वह कभी नहीं लौट पाए। छह जुलाई को ही वे शहीद हो गए। शादी के चंद महीनों बाद पति की शहादत से वह टूट गई थीं। देवेंद्र सिंह के साथ उनका मौसेरा भाई भी कारगिल युद्ध के दौरान ही 6 जुलाई को शहीद हो गया था। पति की शहादत के समय दपेंद्र गर्भवती थीं, जिन्हें बाद में बेटा हुआ। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed