पनुन कश्मीर: मोदी सरकार की जम्मू-कश्मीर और कश्मीरी पंडितों के प्रति नीति चिंताजनक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sun, 18 Jul 2021 08:12 PM IST

सार

पनुन कश्मीर का कहना है कि कश्मीरी हिंदू के साथ हुए नरसंहार को नकारने वाली नीति से बाज आए केंद्र।
अनुच्छेद 370
अनुच्छेद 370 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

केंद्र सरकार की कश्मीर और कश्मीरी पंडितों के प्रति नीति चिंतानजक है, इसमें हमें लगता है कि वर्तमान सरकार भी पूर्व सरकार की तरह ही कश्मीरी केंद्रित राजनीतिक दलों के आगे नतमस्तक हो गई है। केंद्र सरकार आधे अलगाववाद पर आधारित प्रदेश के शासन मॉडल पर चल रही, जो कश्मीरी पंडितों के हित में नहीं है। यह बात पनुन कश्मीर के संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने कही।

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पनुन कश्मीर ने रविवार को अपना स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद सरकार ने कोई उचित कदम नहीं उठाए हैं और न ही सरकार से हमें कोई उम्मीद दिख रही है। वर्तमान की केंद्र सरकार उसी प्रक्रिया को दोहरा रही है, जो 1990 तक पूर्व सरकारें और अलगाववादी करते थे। 2011 की जनगणना का आधार बनाकार परिसीमन करना सरकार के इसी रवैये को उजगार भी कर रहा है।


इस दौरान पनुन कश्मीर के चेयरमैन अजय चुरंगू ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से सरकारी नीतियों ने उन उपलब्धियों को नकारने का काम किया है जो केंद्र सरकार ने हासिल की थी। उन्होंने कहा कि हम सरकार से अपील करते हैं आधे अलगाववाद के आधार पर अपना राजनीति स्वरूप खत्म करें और कश्मीरी हिंदू के नरसंहार को नहीं मानने वाली नीति से भी बाज आए, नहीं तो 370 हटने के बाद भी कश्मीर में अलगाववाद और ताकत से खड़ा होगा।

पीएम पैकेज के तहत नौकरी करने वाले बंधक
पीएम पैकेज के तहत कश्मीर में सरकारी नौकरी कर रहे कश्मीरी पंडित बंधक की तरह रहने को मजबूर हैं। इन कर्मचारियों को अन्य कर्मचारियों की तरह नहीं देखा जा रहा है। सरकार पीएम पैकेज के तहत नौकरी दे रही है पर लोगों को उनके अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं।

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कश्मीरी पंडितों के प्रति नौकरशाही की कार्रवाई निराशाजनक  
वरिष्ठ भाजपा नेता और केपी नेता अश्विनी चुरंगू ने कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय की घर वापसी को लेकर एलजी मनोज सिन्हा का आश्वासन संतोषजनक है, लेकिन नौकरशाही की कार्रवाई निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार विस्थापित समुदाय के युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने में लगी है। वहीं एलजी प्रशासन का एक वर्ग विस्थापित समुदाय और सरकार के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहा है। कश्मीरी पंडितों पर ऐसे कानून लागू किया जा रहे हैं, जिससे मोदी नेतृत्व की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

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