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पाकिस्तानी घुसपैठिए को दो साल की सजा
जेएनएफ/जम्मू
Updated Wed, 01 Mar 2017 01:18 PM IST
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जेल
- फोटो : Demo Pic.
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अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ करते पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक को अतिरिक्त सत्र न्यायालय जम्मू शहजाद अजीम ने दो साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि न देने की सूरत में दोषी को एक महीना अतिरिक्त जेल में रहना होगा।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि अब्दुल कयूम निवासी तहसील एवं जिला सियालकोट पाकिस्तान ने ईमानदारी के साथ अपना जुर्म कबूल लिया है। इससे अदालत का समय भी बर्बाद नहीं हुआ। वह 23 सितंबर 2016 को सरहद पर तारबंदी से घुसपैठ कर रहा था। कोबरा तार के करंट से वह तारबंदी में फंस गया, जिसे बाद में बीएसएफ ने खौड़ पुलिस को सौंप दिया।
उसके पास से चूंकि ऐसी कोई वस्तु या सामग्री बरामद नहीं हुई है जिससे घुसपैठ के पीछे किसी अपराध की मंशा हो। इन तमाम पहलुओं को देखते हुए अदालत फारेनर्स एक्ट और इंडियन पासपोर्ट एक्ट की धाराओं के तहत अधिकतम सजा नहीं दे रही।
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रियायती नजरिया रखते हुए दोषी को फारेनर्स एक्ट 1946 की धारा 14 ए(बी) के दोषी मानते हुए दो साल और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाती है। इसी तरह से पासपोर्ट एक्ट की धारा 3/12 का दोषी मानते हुए एक साल की सजा सुनाती है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
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अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि अब्दुल कयूम निवासी तहसील एवं जिला सियालकोट पाकिस्तान ने ईमानदारी के साथ अपना जुर्म कबूल लिया है। इससे अदालत का समय भी बर्बाद नहीं हुआ। वह 23 सितंबर 2016 को सरहद पर तारबंदी से घुसपैठ कर रहा था। कोबरा तार के करंट से वह तारबंदी में फंस गया, जिसे बाद में बीएसएफ ने खौड़ पुलिस को सौंप दिया।
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उसके पास से चूंकि ऐसी कोई वस्तु या सामग्री बरामद नहीं हुई है जिससे घुसपैठ के पीछे किसी अपराध की मंशा हो। इन तमाम पहलुओं को देखते हुए अदालत फारेनर्स एक्ट और इंडियन पासपोर्ट एक्ट की धाराओं के तहत अधिकतम सजा नहीं दे रही।
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रियायती नजरिया रखते हुए दोषी को फारेनर्स एक्ट 1946 की धारा 14 ए(बी) के दोषी मानते हुए दो साल और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाती है। इसी तरह से पासपोर्ट एक्ट की धारा 3/12 का दोषी मानते हुए एक साल की सजा सुनाती है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।