सीमा पार से घुसपैठ कराना बंद करे पाक: मुफ्ती
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मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने पाकिस्तान को साफ चेताया है कि वह सीमा पार से घुसपैठियों को भेजना बंद करे। एक दिन पहले उन्होंने आतंकी हमलों के लिए पाकिस्तान को कोसा था।
विधान परिषद में एक सवाल के उत्तर के क्रम में मुफ्ती ने कहा कि पाकिस्तान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और पाकिस्तानी सत्ता को यह बता दिया जाना चाहिए कि किसी भी घुसपैठिए को उस पार से इस पार आने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि उनके पिछले कार्यकाल में ही सेना ने तारबंदी की थी। तब पाकिस्तान ने तारबंदी का विरोध किया था और अब घुसपैठ के लिए उस तारबंदी को काटा जा रहा है। मुफ्ती ने कहा कि सीमा पर शांति सुनिश्चित करनी होगी।
हमलोग अमन का माहौल बनाएंगे और पाकिस्तान को भी शांति की बहाली सुनिश्चित करनी पडे़गी। बाद में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का उत्तर देते हुए मुफ्ती ने कहा कि अफस्पा को सेना के साथ विचार-विमर्श के बाद ही हटाया जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा अफस्पा
मुफ्ती ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से ही अफस्पा की वापसी होगी। उन्होंने कहा कि दोनों तरफ शांति कायम रखने के लिए माहौल बनाने की दिशा में सीमा पर शांति जरूरी है। इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना को किसी को भी सीमा के इस ओर आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अफस्पा को एकबारगी नहीं हटाया जा सकता।
पहले कुछ क्षेत्रों को अशांत क्षेत्र कानून से बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि अपस्पा की वापसी पर सेना को कुछ आशंकाएं हैं। उनसे बातचीत के बाद ही अफस्पा चरणबद्ध तरीके से हटेगा। यूनिफाइड कमांड हमारे प्रति जवाबदेह है।
उसमें कोर कमांडर समेत सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी हैं। अफस्पा हटाने पर पहले भी बहुत बहस हो चुकी है। इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। हमारी सरकार उन क्षेत्रों से अफस्पा हटाने की वकालत करती है जो आतंकवाद से मुक्त हो चुके हैं।
सांबा और कठुआ जैसे आतंकी हमले निंदनीय
मुफ्ती ने कहा कि सीमा पर गोलीबारी दोनों तरफ के लोगों के लिए ठीक नहीं है। लोग मरते हैं। घायल होते हैं। सांबा और कठुआ जैसे आतंकी हमले निंदनीय हैं और शांति प्रक्रिया में बाधा डालने की साजिश हैं। पाक को ऐसे तत्त्वों पर नकेल कसनी चाहिए।
अन्यथा हम भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैंठेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अफस्पा को पूरी तरह से हटाने के पक्ष में नहीं हैं। क्रमवार तरीके से इसे हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय गृह मंत्री भी रहे हैं और जम्मू के मुख्यमंत्री भी।
सभी तरह की परिस्थितियों से परिचित हैं। इस दौरान उन्होंने मच्छेल और छत्तरगाम की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसे मामलों में जांच करवाई और पाया कि सेना ने ज्यादती की। तब सेना पर कार्रवाई भी हुई।