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पाकिस्तान रच रहा है जम्मू को नारको टेरेरिज्म का केंद्र बनाने की साजिश

Mon, 04 Jul 2016 11:13 AM IST
अजय मीनिया, अमर उजाला/जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 04 Jul 2016 11:13 AM IST
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Pakistan has planned narco-terrorism center in jammu
pakistan border - फोटो : Amar Ujala

25 सालों से आतंकवाद की मार झेल रहे जम्मू कश्मीर को अब नारको टेरेरिज्म का भी केंद्र बनाने की साजिश की जा रही है। पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती राज्यों में ड्रग तस्करों पर सख्ती की वजह से तस्कर जम्मू को ट्रांजिट सेंटर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 

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पहले राजस्थान बार्डर और केरल  में समुद्री रास्ते से तस्करी होती थी। फिर पंजाब की ओर रुख हुआ और अब जम्मू कश्मीर की सरहद से तस्करी की जा रही है। पिछले एक महीने का रिकार्ड इस और स्पष्ट तौर पर इशारा कर रहा है। 
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सात जून को पुलिस ने नरवाल में नाका लगाकर पांच तस्करों को दस किलो हेरोइन, दस किलो ब्राउन शुगर और 10.40 लाख नकद के साथ दबोचा था। इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से कुपवाड़ा जिले के पास टंगधार इलाके से लाया गया था। पकड़े गए इन तस्करों में एक टंगधार, तीन केरल और एक पंजाब का रहने वाला है। 

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पिछले एक महीने के भीतर तीन ड्रग की तीन बड़ा खेप पकड़ी

Pakistan has planned narco-terrorism center in jammu
pakistan border - फोटो : PTI

इसेक पहले तीन जून को पुलिस ने अंबेडकर चौक से टंगधार के ही रहने वाले तीन तस्करों को तीन किलो हेरोइन के साथ पकड़ा था। यह खेप भी पीओके से टंगधार के रास्ते आई थी। अब सिटी पुलिस ने शनिवार को भी चार तस्करों को तीन किलो ब्राउन शुगर के साथ पकड़ा है। यह खेप भी पाओके से पुंछ के मेंढर के रास्ते इस पार लाई गई।

एक महीने में एक साल से ज्यादा रिकवरी
पुलिस ने पिछले एक महीने के भीतर तीन ड्रग की तीन बड़ा खेप पकड़ी हैं। इनमें 27 किलो हेरोइन और ब्राउन शुगर बरामद की गई है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इसकी कीमत 30 करोड़ से अधिक की है। इतनी बड़ी बरामदगी पिछले एक साल में नहीं हुई। पहले यह बरामदगी ग्राम में होती थी, लेकिन अब यह किलो तक पहुंच गई है। पिछले छह महीने में 70 से अधिक नशा तस्करों को दबोचा गया है। 

तस्करी में महिलाओं और बच्चों का इस्तेमाल
ड्रग तस्करी के लिए महिलाओं और बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तस्कर महिला के साथ एक बच्चे को उसका बच्चा बनाकर भेजा जाता है, ताकि किसी तरह का शक न हो। इसके लिए लंबे रूट की इंटर स्टेट बस का इस्तेमाल किया जाता है, जो पंजाब, जम्मू कश्मीर, राजस्थान से होकर चलती हैं।

वाटसएस के जरिए युवतियां भी शामिल

Pakistan has planned narco-terrorism center in jammu
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सूत्रों का कहना है कि ड्रग के धंधे में शहर की कुछ युवतियां भी शामिल हैं, जो खुद ड्रग एडिक्ट हैं और कैरियर भी। यह युवतियां बड़े घरों को निशाना बना रही हैं। सबसे ज्यादा चिट्टे का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक डोज के लिए तीन से चार हजार रुपये की वसूली हो रही है।

युवतियों ने अपने वाटसएस ग्रुप तक बनाए हुए हैं। इसके माध्यम से घरों तक सप्लाई कर दी जाती है। पुलिस के आला अधिकारी भी मानते हैं कि युवतियां इस धंधे में शामिल हो सकती हैं। 

ड्रग तस्करों की बढ़ती संख्या और शहर में युवाओं पर बढ़ते ड्रग के प्रभाव को लेकर शुुरू की गई पुलिस की संजीवनी योजना ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। संजीवनी के तहत पुलिस के विशेष नाकों पर तस्करों को दबोचा जा रहा है।

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