सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाक ने बनाए आतंकियों के नए लांचिंग पैड
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सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान और पीओके में आतंकियों के नए लांचिंग पैड बना लिए हैं। पाकिस्तान ने घुसपैठ के पुराने रूटों को भी सक्रिय कर दिया है। बार्डर पर बीएसएफ की मुस्तैदी से दो माह में फिदायीन दस्तों की घुसपैठ की 8 कोशिशें नाकाम की गईं लेकिन सुरक्षा कवच के सुराख अब भी आतंकियों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक में एलओसी पर पुंछ से कुपवाड़ा तक के सभी लांचिंग पैड ध्वस्त कर दिए गए थे लेकिन अब नए लांचिंग पैड सक्रिय हैं। नगरोटा में सेना की 16वीं कोर के मुख्यालय की 166 आर्टिलरी यूनिट पर फिदायीन हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने गृह मंत्रालय को इस आशय की रिपोर्ट भेजी है।
बार्डर के उस पार स्थित आतंकियों के लांचिंग पैड सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी बरकरार रह गए थे। कठुआ और सांबा जिले से बार्डर शुरू से फिदायीन दस्तों के लिए घुसपैठ का पसंदीदा रास्ता रहा है। बार्डर के इस इलाके में फिदायीन दस्ते लगातार घुसपैठ का रूट बदलते हैं।
नहीं हो सके घुसपैठ रोकने के पुख्ता बंदोबस्त
नगरोटा सैन्य यूनिट पर हमले और रामगढ़ सेक्टर में आतंकी घुसपैठ से पहले सुरक्षा एजेंसियों को दस आतंकियों की घुसपैठ की आशंका के इनपुट मिल गए थे। पूर्व सूचना के बावजूद घुसपैठ रोकने में विफलता एजेंसियों में तालमेल की कमी की ओर इशारा करता है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों और सेना की अलग-अलग एजेंसियां हैं। दूसरी एजेंसियों की सूचनाओं को रुटीन का हिस्सा मान लिए जाने के कारण कई बार चूक हो जाती है। सुरंगें लगातार मिलती रही हैं लेकिन इससे घुसपैठ रोकने के पुख्ता बंदोबस्त नहीं हो सके।
सीजफायर उल्लंघन की आड़ में 25 आतंकी घुसपैठ में सफल
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आतंकियों की घुसपैठ घटने के बजाए बढ़ गई। गृह मंत्रालय के दस्तावेज बताते हैं कि पिछले साल सिर्फ 33 आतंकी घुसपैठ करने में सफल रहे थे जबकि इस साल सितम्बर तक में 105 आतंकी भारतीय सीमा में दाखिल हुए।
अक्टूबर और नवम्बर में भी सीजफायर के उल्लंघन की आड़ में कम से कम 25 आतंकी घुसपैठ में सफल रहे हैं। चार साल में 325 आतंकी घुसपैठ में सफल रहे हैं। केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा के लिए पूर्व केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी।
कमेटी की रिपोर्ट केंद्र को दो महीना पहले 29 अगस्त को मिल चुकी है लेकिन इस पर अमल नहीं पाया है। इसमें तारबंदी के खाली स्थानों पर लेजर दीवारें, रडार, इलेक्ट्रो आप्टिक सेंसरों की स्थापना को जरूरी बताया गया है। हाई रिजोल्यूशन वाले डे नाइट विजन कैमरों की संख्या बढ़ाई जानी है।