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सांबा छोड़ ISI ने हीरानगर को बनाया नया टारगेट

Sat, 27 Dec 2014 12:02 PM IST
Updated Sat, 27 Dec 2014 12:02 PM IST
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pakistan cover fire for terrorist infiltration in india

घने कोहरे और सीमा के निकट सरकंडों के चलते भारत पाक अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पाक खुफिया ऐजेंसी प्रभावित करने के प्रयास में है क्योंकि सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। अब घुसपैठियों के लिए इस सेक्टर से घुसपैठ करना टेढ़ी खीर है। इससे वह आए दिन सीमा पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए कोई ना कोई हथकंडा अपना रहे हैं।

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रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सांबा सेक्टर की सीमा पर घुसपैठियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। वह मौके की तलाश में है की कब उन्हें मौका मिले घने कोहरे की आढ़ में वह भारतीय सीमा में प्रवेश कर सकें। सूत्रों के अनुसार घुसपैठियों का एक दल काफी दिनों से इस क्षेत्र में सक्रिय है।
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पहले वह बसंतर क्षेत्र के वल्लड फारवर्ड के सामने पाक की इमरान पोस्ट से घुसपैठ की योजना में थे, गलाड टांडा में भी हलचल देखी गई थी। ये खोआडा की शहीद अकरम व मंगुचक के सामने भोपालपुर क्षेत्र से अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार गत दो दिनों से हीरानगर की सीमा पर पाक रेंजरों द्वारा घुसपैठ के इरादे से गोलीबारी की जा रही है।
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सांबा सेक्टर घुसपैठियों का पुराना क्षेत्र रहा है। आईबी से हाईवे के निकट होने का भी उन्हें फायदा मिलता है। जिस से वह सांबा सेक्टर की सीमा को अति सुरक्षित मानते हैं। यही कारण है की इस क्षेत्र में घुसपैठियों की हमेशा नजर रही है। वही सीमा को सील किए जाने से भी पाक रेंजरो में हड़बड़ाहट है। अब वह हीरानगर की और अपना रुख कर रहे हैं।

पाक गोलीबारी से सीमांत गांवों में दहशत

pakistan cover fire for terrorist infiltration in india

सांबा के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग दहशत में हैं की पाक सैनिकों की और से की जाने वाली गोलीबारी से उन का क्या होगा। आज भी ग्रामीण शाम के समय अपने परिवारों को लेकर चिंतित रहते है। ग्रामीणों के अनुसार दिन तो व्यतीत हो जाता है लेकिन जैसे जैसे शाम ढलती है उन की जान आफत में आ जाती है।

भारत पाक सीमा के साथ सटे गांव चचवाल और चलेआरी जो पहले भी सुर्खियों में रहा था के ग्रामीण पृथी सिंह ने बताया कि उनके गांव भी जीरो लाईन के निकट ही है। पाक की गोलाबारी का सीधा असर उन पर ही होता है।

उन का कहना था की पाक रेंजरों द्वारा की जाने वाली फायरिंग से अधिक नुकसान उठना पड़ता है। उन्होंने बताया की अक्तूबर में भी पाक सेना की गोलीबारी से चलेआरी गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों को जान गंवानी पड़ी थी।

खेतों में जाने से भी लगता है डर

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स्‍थानीय लोगों के अनुसार जब भी सीमा पर पाक रेंजर फायरिंग करते है तो उन्हें बुरे दिनों की याद आने लगती है। वह एक बार सिहर उठते है कि कहीं फिर से पाक रेंजर उन के गांव को निशाना न बना दें।

सनद रहे की हीरानगर के सीमांत गांव करोल कृष्णा में पाक रेजरों की ओर से गत दिनों फायरिंग की जा रही है जिससे सीमांत ग्रामीण भी परेशान हो रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार दिन के समय तो सब कुछ ठीक रहता है जैसे ही शाम ढलना शुरू होती है उन की सांसें भी अटक जाती है कि पता नहीं अब किस के घर पर गोला गिरेगा। उन्हें हर दम अपने परिवारों की चिंता सताती है।

उन के अनुसार की अब गेहूं की फसल की बिजाई चल रही है ऐसे में वे लोग खेतों मे जाने से भी कतराने लगे है।

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