पाकिस्तान की गोलाबारी ने लगाया J&K के बार्डर टूरिज्म पर ग्रहण
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बार्डर पर तनाव का असर जम्मू के पर्यटन पर भी पड़ा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वैष्णो देवी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बताती है। इसमें लगभग 25 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। कई साल के बाद ऐसा हुआ है, जब अक्तूबर के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई हो।
यही नहीं, मुश्किल से जम्मू में आने वाले पर्यटकों का रुझान बार्डर टूरिज्म की तरफ बड़ा था, लेकिन तनाव से यह चौपट हो गया। जानकारी के अनुसार अक्तूबर महीने में इस साल वैष्णो देवी 583194 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि इसी महीने पिछले साल 794623 श्रद्धालु वैष्णो देवी पहुंचे।
सुचेतगढ़ और इसके आसपास के सीमांत क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों की संख्या हजार से पंद्रह सौ प्रतिदिन थी, लेकिन पाक गोलाबारी से यह संख्या शून्य पर पहुंच गई है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही सीमा पर अशांति का माहौल है।
गोलाबारी और हिंसा से गरीबों को सबसे ज्यादा नुकसान
सीमा पर अशांति के माहौल की वजह से जम्मू आने वाले पर्यटकों ने बार्डर टूरिज्म से किनारा कर लिया। अब सुचेतगढ़ और इसके आसपास कोई नहीं जा रहा। यहां तक इन इलाकों के रहने वाले लोग भी छिपकर जीवन जी रहे हैं। पर्यटन विभाग भी मानता है कि पाक गोलाबारी का असर बार्डर टूरिज्म पर पड़ा है।
गौरतलब है कि कश्मीर घाटी और सीमा पर पाकिस्तानी गोलाबारी की वजह से जम्मू-कश्मीर के पर्यटन उद्योग को पिछले कुछ दिनों में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। एक ओर जहां घाटी के खराब हालातों से जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है वहीं पर्यटकों के सहारे ही अपना जीवन चलाने वाले तमाम छोटे व्यापारियों को भी बहुत नुकसान उठाना पड़ा है।