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'मौत ने हिलने तक का मौका नहीं दिया'

Tue, 07 Oct 2014 03:56 PM IST
Updated Tue, 07 Oct 2014 03:56 PM IST
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Firing at LOC - Pak Shelling on Indian borders

स्थान : महाशय दे कोठे।

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समय : सुबह 9 बजे।

तहस-नहस हो चुके घर में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। खूंटे से बंधी श्यामवर्णी गाय बुरी तरह से रंभा रही थी, लेकिन उसकी पुकार सुनने की फुरसत किसी के पास नहीं थी। उसे सबेरे से न चारा मिला था, न पानी। रोज की तरह उसका दूध भी नहीं दुहा गया था।

आंखों के सामने पड़ी बछिया में भी कोई हलचल नहीं थी। बेचारी गाय को क्या पता कि उस घर पर पाक की बरसाई मौत ने झपट्टा मारा था। घर के 11 सदस्यों में से चार मौत के मुंह में जा चुके थे, 7 जख्मी थे। घर में हर तरफ लहू फैला था।
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दीवारें, दरवाजे और खिड़कियां ही नहीं, बर्तन, खिलौने और तसवीरें तक क्षत-विक्षत थीं। आंगन में और बाहर पालतू पशुओं के चीथड़े उड़े शव और इधर-उधर छितराए उनके अंग हौलनाक अनहोनी की कहानी कह रहे थे।
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घरों में हर तरफ दिख रहे खून के निशान

Firing at LOC - Pak Shelling on Indian borders

नजारा ऐसा, कि मजबूत जिगर वाले का भी कलेजा कांप जाए। इस घर पर कई मोर्टार गिरे थे। 32 वर्षीय राजेश कमरे में सोया था। मोर्टार के धमाकों से घर कांप उठा तो वह घबराकर बाहर आया और पत्नी को अंदर कमरे में भेजा।

वह खुद भी कमरे की ओर भागा लेकिन दरवाजे से दो फुट पहले ही सरहद पार से आए गोले का शिकार हो गया। पत्नी ने लहूलुहान पति को बांहों में संभालने की कोशिश की पर तब तक तो अनहोनी हो चुकी थी।

सुबह उसके शव को उठाकर अस्पताल पहुंचाया गया। दरवाजे के सामने जमा रक्त राजेश की दर्दनाक मौत की दास्तान बयां कर रहा था। इसी बरामदे में राजेश का बड़ा भाई पुरुषोत्तम उर्फ पप्पू (40), काजल(13) और सत्या देवी(50) भी सोईं थीं।

जब एक ही घर से निकलीं चार अर्थियां

Firing at LOC - Pak Shelling on Indian borders

तीनों को बिस्तर से उठने तक का मौका नहीं मिला। बरामदे में खून से सने बिस्तर परिवार पर आई काली रात की छाया दर्शा रहे थे। दो कुत्ते, एक बछिया और एक बकरी के शव भी इधर-उधर पड़े थे।

किसी जानवर की टांग कहीं तो धड़ कहीं था। नन्हे बच्चे की साइकिल बरामदे में ही खून से सनी पड़ी थी। मोर्टार के स्पिलिंटर दीवार पर टंगी तस्वीर के चारों ओर दीवार पर कई छेद कर चुके थे। बरामदे की दीवारों पर मोर्टार से इतने छेद हुए थे कि उन्हें गिनना मुश्किल था।

पाकिस्तानी गोलाबारी ने अरनियां क्षेत्र के महाशय दे कोठे गांव के एक परिवार को उजाड़ दिया। रविवार की रात को गिरे गोलों ने इस परिवार के चार लोगों की जिंदगी छीन ली। एक घर से चार अर्थियां निकलने पर लोगों की आंखों से अश्रुधारा थमने का नाम नहीं ले रही थी।

शवों को रखने को छोटा पड़ा घर का आंगन

Firing at LOC - Pak Shelling on Indian borders

परिवार के बचे लोगों को यह जख्म जिंदगी भर दुखते रहेंगे। घर में शवों को रखने के लिए आंगन भी छोटा पड़ गया। ऐसे में परिवार के लोगों को तीन शव आंगन और एक कमरे में रखना पड़ा।

शवों को जब श्मशान घाट की ओर ले जाया रहा था तो गांव के लोग बुरी तरह बिलख रहे थे। बड़ी संख्या में लोगों का सैलाब अंतिम यात्रा में उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शवों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। उन्होंने मृतकों के घरवालों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

पाकिस्तान की तरफ से भारी गोलाबारी के चलते राज्य प्रशासन ने आईबी के पास के तकरीबन 25 गांवों को खाली करने के आदेश दिए हैं। इन गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए जगह चिह्नित की गई है।

सरहद से सटे गांव खाली करने के आदेश

Firing at LOC - Pak Shelling on Indian borders

बता दें कि अरनियां और महाशय दे कोठे पहली बार पाकिस्तानी गोलों का निशाना बने हैं। प्रशासन ने आईबी से सटे गांवों को खाली करने के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने इन गांवों के लोगों को बिश्नाह, दयोली, स्लैड़ और रिहाल में रहने के लिए स्थान तय किए हैं।

उधर, इलाके के करीब 70 प्रतिशत ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर गए हैं। इनमें से कई लोग अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। देर शाम तक लोगों का पलायन जारी था। हालांकि, प्रशासन के आदेश के बाद लोगों को सुरक्षित जगह ले जाने के लिए वाहनों का इंतजाम किया जाना था।

लेकिन देर रात तक कोई वाहन नहीं पहुंच पाया था। इसके चलते लोगों ने खुद ही गांव छोड़ देना उचित समझा। इधर, कुछ लोग जो अभी गांवों में ही ठहरे हुए हैं, वह दहशत में हैं और चिंता में हैं कि वह अगली सुबह देख भी सकेंगे या नहीं।

अंतिम संस्कार में शामिल हुए उमर

Firing at LOC - Pak Shelling on Indian borders

महाशय दे कोठे गांव में गोलाबारी में मारे गए चार लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान हमारे नागरिकों को निशाना बना रहा है। सीमा पर माहौल देखते हुए उन्होंने कहा कि इन गांवों में जल्द ही पक्के बंकर बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने मृतकों के घरवालों और घायलों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उधर, जिलाधीश अजीत कुमार साहू, डीजीपी राजेश कुमार, एसएसपी जम्मू उत्तम चंद भी गांव में हालात का जायजा लेने पहुंचे। अधिकारियों से ग्रामीणों ने गांव में रहने के बजाय सुरक्षित जगह पर स्थायी रूप से भेजने की मांग की, भले ही वहां उन्हें फिलहाल टेंट में रखा जाए।

इस पर अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन इसका हल निकालने के लिए प्रयासरत है। इस मौके पर मृतकों के घरवालों को एक-एक लाख, गंभीर घायलों को दस-दस हजार और मामूली घायलों को पांच-पांच हजार रुपये की तुरंत मदद की घोषणा की गई। स्थिति का जायजा लेने के लिए विधायक अश्विनी शर्मा, नेकां के डाक्टर कमल अरोड़ा भी पहुंचे।

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