इनकी तो कहीं दीवाली भी न रह जाए बेरौनक
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काकू दे कोठे के दलबीर सिंह यूं तो दिन में एक बार घर का चक्कर लगाने चले जाते हैं, लेकिन इस बार वह दिवाली का त्योहार अपने घर में मना पाएंगे या नहीं, इस बात को लेकर उन्हें संदेह है। उनकी भाभी और पत्नी मायके में हैं, भाई फौज में है।
खुद बुजुर्ग मां-बाप के साथ रिहाल में लगाए गए शिविर में रह रहे हैं। ऐसी ही स्थिति अन्य लोगों की भी है, जिन्होंने गोलाबारी के चलते अपने आशियाने की जगह शिविर में समय गुजारने के लिए मजबूर हैं। करवाचौथ के बाद रोशनी का त्योहार भी इस बार वह शायद ही अपने घर में मना सकेंगे।
गोलाबारी से सीमावर्ती ग्रामीणों के घर छलनी हो गए हैं। दीवारों पर बने निशान और क्षतिग्रस्त छत पाक की करतूत ही बयां नहीं करते, बल्कि प्रभावित परिवारों को अशांत भी करते हैं। लगातार हो रही गोलाबारी से त्योहारों का रंग भी फीका हो रहा है।
त्यौहार से ज्यादा सता रही जान की चिंता
बच्चे और युवा जश्न की तैयारियों के बजाय शिविरों में परिवार के साथ जैसे-तैसे समय गुजार रहे हैं। हालात जल्द बेहतर हो भी जाए, तब भी वह उत्साह शायद ही दिखे, जो गोलाबारी से पहले के मौके पर दिखाई देता था।
वहीं घर लौटने के साथ सबकी पहली प्राथमिकता यही होगी कि जल्द से जल्द घरों की मरम्मत कराई जाए, क्योंकि आने वाली दिनों में सर्दी की मार भी पड़ने वाली है।
अरनिया, अला, काकू दे कोठे, ज्योड़ा फार्म, महाशे दे कोठे जैसे गांवों में दर्जनों मकान टूट गए हैं। ज्यादातर की छतें, दीवारें, खिड़कियां दरवाजे, क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अरनिया बाजार बंद है। दुकानदार राहत शिविरों में बैठे हैं। इससे पहले करवाचौथ व्रत के मौके पर भी महज रस्म अदायगी ही की गई।
सीमांत क्षेत्र के पशुओं को मिलेगा सुरक्षित स्थान
पाक गोलाबारी प्रभावित सीमांत क्षेत्र के लोगों के जानवरों को भी सुरक्षित जगहों पर रखने के प्रबंध किये गये हैं। जिला प्रशासन द्वारा इसके लिये वेटरनरी विभाग की 17 टीमें गठित की गई हैं।
अरनिया, निकोवाल, त्रेवा, ज्योड़ा फार्म, सुचेतगढ़, अब्दुल्लियां, चिनौर, परगवाल, हमीरपुर कोन जैसे सीमांत क्षेत्रों के 28000 लोगों को जिला प्रशासन द्वारा स्थापित सुरक्षित राहत शिविरों में ठहराया गया है।
गोलाबारी के कारण लोग सात हजार से के करीब पशुओं को भी सुरक्षित जगहों पर ले जाने को विवश हुये हैं। गौरतलब है के गोलाबारी के कारण 29 पशु मर गये थे जबकि 85 घायल हुये हैं।
अभी तक 28 हजार लोग हुए बेघर
प्रशासन ने पशु पालन की 13 और भेड़ पालन विभाग की 4 टीमें गठित की हैं जिनका काम पशुओं को बेहतर चिकित्सा देना है। इनमें से छह टीमें आरएसपुरा, बिशनाह ब्लाक में काम कर रही हैं जबकि 4 मढ़ में और 4 अखनूर तथा खोड़ ब्लाक में काम कर रही हैं।
जम्मू में दो मोबाइल क्लीनिकल यूनिटस भी बनाए गए हैं। सीमांत क्षेत्र के प्रभावित पशुओं के लिये अभी तक 153 क्विंटल भूसा किसानों को मुहैया करवाया गया है। गोलाबारी के कारण गंभीर रूप से घायल 9 जानवरों को आरएसपुरा के सुकास्ट में भर्ती करवाया गया है।
इनमें से 6 चिनौर फार्म के और तीन हमीरपुर कोना से लाया गया। पशुओं को लाभ पहुंचाने केलिये किये गये प्रबंधों में प्रभावित क्षेत्रों के ब्लाक वेटरनरी अधिकारियों का भी सहयोग लिया जा रहा है।