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सीमा पर धोखा देने से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 06 Nov 2016 08:26 PM IST
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इंडो पाक बॉर्डर पर बीएसएफ ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था
- फोटो : फाइल फोटो
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भारत को लगातार धोखा देने की नीयत से पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है। अब वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र के खेतों में खड़ी धान की फसल को चुपचाप कटाने की फिराक में है। बिना बातचीत के रविवार को उसने जब ऐसा करने का प्रयास किया तो बीएसएफ के जवानों ने लाल झंडा दिखाकर मशीनों को खेतों से वापस करा दिया।
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बता दें कि इसके पहले भारत और पाकिस्तान दोनों क्षेत्रों के किसान सीमा के पास के खेतों में आमने-सामने होकर फसल की कटाई करते रहे हैं। इस दौरान बीएसएफ और रेंजर अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी करते हैं।जानकारी के अनुसार आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तान अपने सीमावर्ती खेतों में कंबाइन मशीनों को लगाकर धान की कटाई करा रहा था।
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वहीं, सुरक्षा के लिहाज से फिलहाल भारतीय क्षेत्र में किसानों को तारबंदी के पास नहीं जाने दिया जा रहा है। इस पर सीमा पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने लाल झंडा दिखाकर पाकिस्तान को तारबंदी के पास धान की कटाई करने के लिए मना कर दिया।
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गोलाबारी से सीमा पर खड़ी फसल को भारी नुकसान
सीमा पर खड़ी फसल को भारी नुकसान
- फोटो : फाइल फोटो
बीएसएफ का मानना है कि जब तक हमारे किसान तारबंदी की भूमि पर धान की कटाई नहीं कर लेते तब तक पाकिस्तानी क्षेत्र में उनके किसानों को धान की कटाई नहीं करने दी जाएगी। भारतीय क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पाकिस्तान की गोलाबारी से खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
किसानों का कहना है कि खेतों में बिना फटे कई मोर्टार पड़े हैं। इसके चलते उन्हें दिक्कतों को उठाना पड़ रहा है। जब तक बीएसएफ की ओर से इन खेतों में जाकर जांच पड़ताल नहीं की जाती तब तक सीमा के साथ सटी भूमि में धान की कटाई करना मुश्किल होगा।
अब्दुल्लियां गांव के पूर्व सरपंच चौ. बचन लाल, जीतराज, बिशनदास का कहना है कि सीमा पर बेशक गोलाबारी बंद है, पर उनके लिए आज भी गोलाबारी जैसे हालात बने हुए हैं। परिवार के अधिकतर लोग शिविरों में हैं। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
किसानों का कहना है कि खेतों में बिना फटे कई मोर्टार पड़े हैं। इसके चलते उन्हें दिक्कतों को उठाना पड़ रहा है। जब तक बीएसएफ की ओर से इन खेतों में जाकर जांच पड़ताल नहीं की जाती तब तक सीमा के साथ सटी भूमि में धान की कटाई करना मुश्किल होगा।
अब्दुल्लियां गांव के पूर्व सरपंच चौ. बचन लाल, जीतराज, बिशनदास का कहना है कि सीमा पर बेशक गोलाबारी बंद है, पर उनके लिए आज भी गोलाबारी जैसे हालात बने हुए हैं। परिवार के अधिकतर लोग शिविरों में हैं। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।