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Pahalgam Attack: 'शांति चाहिए... मुझे पाकिस्तान भेजकर मत मारिए', कश्मीर में ब्याही पाक महिला अलीजा की गुहार
Tue, 29 Apr 2025 01:44 PM IST
शाहरुख खान
भट शहजाद, अमर उजाला, बांदीपोरा
भट शहजाद, अमर उजाला, बांदीपोरा
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 29 Apr 2025 01:44 PM IST
सार
कश्मीर में ब्याही पाकिस्तानी महिला अलीजा ने सरकार से यहीं रहने देने की अपील की है। अलीजा का कहना है कि शांति चाहिए, मुझे पाकिस्तान भेजकर मारिए मत।
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रोते हुए बोलीं अलीजा-कैसे छोड़ूं पति और बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हमने हिंसा को पीछे छोड़ शांति को चुना है। अब हमें क्यों सजा दी जा रही है। एक मां अपनी पांच साल की बेटी के बिना कैसे रह सकती है। ये बातें बताते हुए अलीजा के आंसू छलक पड़ते हैं। वह कहती हैं, दोषियों को सजा दीजिए, लेकिन हमें मत बांटिए।
उन्होंने कहा कि हमें परिवार से अलग कर पाकिस्तान भेजकर हमें मत मारिए। अधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, ऐसी 17 महिलाएं हैं, जिन्हें 29 अप्रैल से पहले घाटी छोड़ने के निर्देश देते हुए नोटिस भेजा गया है।
कश्मीर में पूर्व आतंकवादी मोहम्मद रफ़ीक से विवाह करने वाली पाकिस्तान की अलीजा ने सरकार से घाटी में रहने की अनुमति देने की अपील की है। अलीजा ने कहा, हम आठ साल से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं।
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सरकारी दस्तावेज अपने पास रखे हैं। एक दशक से अधिक समय से कश्मीर में रह रही अलीजा ने कहा कि वह 2010 में शुरू की गई पुनर्वास नीति के तहत आई थीं। इसका उद्देश्य पूर्व आतंकवादियों को फिर से मुख्यधारा में शामिल करना था, जो नियंत्रण रेखा पार कर गए थे।
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उन्होंने कहा कि हमें परिवार से अलग कर पाकिस्तान भेजकर हमें मत मारिए। अधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, ऐसी 17 महिलाएं हैं, जिन्हें 29 अप्रैल से पहले घाटी छोड़ने के निर्देश देते हुए नोटिस भेजा गया है।
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कश्मीर में पूर्व आतंकवादी मोहम्मद रफ़ीक से विवाह करने वाली पाकिस्तान की अलीजा ने सरकार से घाटी में रहने की अनुमति देने की अपील की है। अलीजा ने कहा, हम आठ साल से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं।
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सरकारी दस्तावेज अपने पास रखे हैं। एक दशक से अधिक समय से कश्मीर में रह रही अलीजा ने कहा कि वह 2010 में शुरू की गई पुनर्वास नीति के तहत आई थीं। इसका उद्देश्य पूर्व आतंकवादियों को फिर से मुख्यधारा में शामिल करना था, जो नियंत्रण रेखा पार कर गए थे।
अलीजा के पति मोहम्मद रफ़ीक के अनुसार, पाकिस्तान जाने के समय 17 साल का था। तब मैं छोटा था और मैंने गलती की। जब पुनर्वास नीति के तहत लौटा, तो मैंने अपने अतीत से सभी संबंध तोड़ लिए।
अपनी वापसी के बाद से एक मजदूर के रूप में ईमानदारी से जीवन व्यतीत किया है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने और अपने अतीत को पीछे छोड़ने के लिए अथक परिश्रम कर रहा हूं।
गौरतलब है कि पहलगाम में हाल में हुए आतंकी हमले के बाद अधिकारियों ने पूर्व आतंकवादियों की पाकिस्तानी पत्नियों को नोटिस जारी कर उन्हें कश्मीर छोड़ने के लिए कहा है।
कश्मीर घाटी में तनाव के बीच लौटने लगे कुछ प्रवासी मजदूर
उधर, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल ने यहां बाहरी राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों पर भी प्रभाव डाला है। करीब 20 प्रतिशत मजदूर जो यहां दिहाड़ी मजदूरी करते थे, ने पंजाब और अन्य राज्यों का रुख किया है। हालांकि इस बीच जम्मू कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षाबलों ने उन क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है जिन इलाकों में यह प्रवासी मजदूर रहते हैं।
उधर, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल ने यहां बाहरी राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों पर भी प्रभाव डाला है। करीब 20 प्रतिशत मजदूर जो यहां दिहाड़ी मजदूरी करते थे, ने पंजाब और अन्य राज्यों का रुख किया है। हालांकि इस बीच जम्मू कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षाबलों ने उन क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है जिन इलाकों में यह प्रवासी मजदूर रहते हैं।
बिलाल लोन नामी एक ठेकेदार ने कहा कि वो कंट्रक्शन का काम करता है और हर साल उसके पास करीब 200 से अधिक मजदूर आते हैं जो उसकी टीम का हिस्सा होते हैं। उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले के बाद उनमें भी डर का माहौल पैदा हो गया है। करीब 50 तो उनमें से पंजाब चले गए हैं जबकि जो यहां रह रहे हैं उनमें भी खौफ जरूर है। बिलाल ने बताया कि वो रोजाना उनके कमरों पर जाकर उनसे मुलाकात करते हैं ताकि उनको सुरक्षित माहौल का एहसास हो सके।
करीब 20 प्रतिशत प्रवासी मजदूर लौट गए
उन्होंने बताया कि श्रीनगर शहर की बात करें तो करीब 20 प्रतिशत प्रवासी मजदूर लौट चुके हैं। इस बीच बिहार मोतिहारी के दीना लाल शर्मा जोकि कश्मीर में पिछले करीब 20 साल से बढ़ई का काम करते हैं ने कहा कि जब भी ऐसे हमले होते हैं तो डर जरूर रहता है। हमारे कई साथी लौट जाते हैं लेकिन हमें यहां स्थानीय लोगों से काफी सहयोग मिलता है। वह हमारा ध्यान रखते हैं।
उन्होंने बताया कि श्रीनगर शहर की बात करें तो करीब 20 प्रतिशत प्रवासी मजदूर लौट चुके हैं। इस बीच बिहार मोतिहारी के दीना लाल शर्मा जोकि कश्मीर में पिछले करीब 20 साल से बढ़ई का काम करते हैं ने कहा कि जब भी ऐसे हमले होते हैं तो डर जरूर रहता है। हमारे कई साथी लौट जाते हैं लेकिन हमें यहां स्थानीय लोगों से काफी सहयोग मिलता है। वह हमारा ध्यान रखते हैं।
वहीं जम्मू कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे लोग हमेशा सॉफ्ट टारगेट रहते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस हमले के बाद से उन इलाकों में जहां यह लोग रहते हैं, वहां सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और साथ ही इन लोगों से जल्दी अपने कमरों में जाने और बिना किसी काम बाहर घूमने से परहेज करने की भी सलाह दी है। कुछ जगहों पर लोकल पुलिस थानों के नंबर भी साझे किये गए हैं ताकि जरुरत पड़ने पर सम्पर्क किया जा सके।