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नोटबंदी के बाद आतंक के ओवरग्राउंड वर्कर चित, आतंकी संगठनों से मांगी नई करेंसी

Mon, 21 Nov 2016 12:07 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 21 Nov 2016 12:07 PM IST
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overground workers demanded new currency from terrorist organisation after noteban
Terrorist - फोटो : File Photo
पुराने नोट बंद करने का असर आतंकी गतिविधियों पर भी जबरदस्त तरीके से पड़ा है। आतंकी संगठनों के लिए काम करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर भी चित हो गए हैं। वर्करों ने संगठनों से मांग की है कि जब तक उन्हें नई करेंसी नहीं मिलेगी, वह काम नहीं करेंगे। 
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जम्मू-कश्मीर और पंजाब बार्डर एवं एलओसी पर करीब तीन हजार ओवर ग्राउंड वर्कर सक्रिय हैं। ये वर्कर आतंकी संगठनों के लिए गाइड और पोर्टर का काम करते हैं। संगठनों से रूट और हथियार व अन्य सामान के भार के हिसाब से पैसे लिए जाते हैं। सबसे खतरनाक रूट के लिए प्रति किलोमीटर 10 हजार रुपये, आसान रास्ते के लिए 5 हजार लिए जाते हैं।
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इसके अलावा खुफिया सूचनाएं पहुंचाने और खाने-पीने की सामग्री के लिए अलग से पैसे लिए जाते हैं। घुसपैठ के बाद आतंकियों के हथियारों को यही वर्कर ले जाते हैं। इसलिए वेट के हिसाब से पैसे लिए जाते हैं। पुराने नोट बंद होने से वर्करों ने आतंकी संगठनों को ना कह दी है। संगठनों से मांग की गई है कि यदि उनके लिए काम करना है तो नई करेंसी के नोट दें।
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करोड़ों रुपये की पूंजी है जमा, ऐसे होता है काम

overground workers demanded new currency from terrorist organisation after noteban
Terrorist - फोटो : फाइल फोटो

खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि ओवरग्राउंर वर्करों के पास करोड़ों रुपये की पुरानी करेंसी है। यह करेंसी सामने नहीं आएगी। यदि सामने आई तो बहुत से ऐसे वर्कर बेनकाब होंगे, जो आतंकी गतिविधियों के लिए काम करते हैं। सरहद पर नोट बंद होने से आतंकी गतिविधियां ठंडी पड़ गई हैं। 

ओजी वर्कर आतंकियों को घुसपैठ के बाद रिसीव करने जाते हैं। इसके बाद उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाते हैं। रहने के लिए बंदोबस्त करते हैं। महीनों हमलों के लिए तय जगह की जानकारी जुटाते हैं। घुसपैठ के बाद उनका सामान उठाकर लाते हैं। 

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