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जवानों के फौलादी सीने को नहीं भेद पाएगी दुश्मनों की गोली, ऐसी है ये बुलेट प्रूफ जैकेट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 12 Aug 2018 12:33 AM IST
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एके-56 की गोली से अब जवानों को हल्की बुलेट प्रूफ जैकेट बचाएगी। ओईएफ (ऑर्डिनेंस इक्यूपमेंट फैक्ट्री) कानपुर ने सेना के जवानों के लिए हल्की बुलेट प्रूफ जैकेट बनाई है। 9.5 किलोग्राम वजनी इस जैकेट को मिश्र धातु निगम (मिथानी) से बनाया गया है। परीक्षण के लिए बीएसएफ को दिया गया था।
सूत्रों ने बताया कि 5 मार्च को ये जैकेट डीजी बीएसएफ को दी गई थी। इस दौरान इसका चार चरणों में परीक्षण होना था। इसमें सामने और पीछे के अलावा शरीर के नाजुक अंगों (जैसे हृदय, फेफड़े, किडनी आदि) को टारगेट करके मारी गई गोली पर परीक्षण किया जा चुका है। इन तीन में ये सफल रही है। अब सिर्फ साइड गार्ड का परीक्षण बाकी है।
बनाने में कार्बन नैनोटेक्नोलॉजी का प्रयोग
जैकेट में तीन स्तर पर सॉफ्ट और हार्ड आर्म प्लेटें लगाई गई हैं। ये शरीर के अंगों को अधिक सुरक्षित रखते हैं। इसमें कार्बन नैनोटेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। आमतौर पर पूरी बुलेट प्रूफ जैकेट का भार 10-13 किलो से अधिक होता है। दावा किया गया है कि इस जैकेट को कारबाइन, एके 47 और एके-56 की गोली भी नहीं भेद पाएगी।
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सूत्रों ने बताया कि 5 मार्च को ये जैकेट डीजी बीएसएफ को दी गई थी। इस दौरान इसका चार चरणों में परीक्षण होना था। इसमें सामने और पीछे के अलावा शरीर के नाजुक अंगों (जैसे हृदय, फेफड़े, किडनी आदि) को टारगेट करके मारी गई गोली पर परीक्षण किया जा चुका है। इन तीन में ये सफल रही है। अब सिर्फ साइड गार्ड का परीक्षण बाकी है।
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बनाने में कार्बन नैनोटेक्नोलॉजी का प्रयोग
जैकेट में तीन स्तर पर सॉफ्ट और हार्ड आर्म प्लेटें लगाई गई हैं। ये शरीर के अंगों को अधिक सुरक्षित रखते हैं। इसमें कार्बन नैनोटेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। आमतौर पर पूरी बुलेट प्रूफ जैकेट का भार 10-13 किलो से अधिक होता है। दावा किया गया है कि इस जैकेट को कारबाइन, एके 47 और एके-56 की गोली भी नहीं भेद पाएगी।
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