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स्टेट कमीशन का गठन नहीं करने पर हाईकोर्ट सख्त
जेएनएफ /जम्मू
Updated Fri, 19 Aug 2016 11:43 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : Demo Pic.
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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुुमार और न्यायाधीश अली मोहम्मद मागरे की खंडपीठ ने ओरिएंटल बीमा कंपनी की याचिका सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से नाराजगी जताई।
खंडपीठ ने कहा कि अभी तक सरकार ने स्टेट कमीशन का गठन नहीं किया है। सरकार की मुख्य सचिव, कानूून सचिव, सीएपीडी विभाग के सचिव की कमेटी ने स्टेट कमीशन में अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। कोर्ट ने पहले 30 दिन और बाद 15 दिन का समय दिया कि वह सदस्यों की नियुक्ति कर दे। साथ ही अब कोई भी समय दिए बगैर आपत्तियां पेश करने के आदेश दिए गए।
राज्य जवाबदेह आयोग, राज्य मानव अधिकार आयोग आदि में चेयरमैन और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जानी थी। मुख्य सचिव, कानून विभाग सचिव और सीएपीडी विभाग के सचिव अपने कार्यालयों में हैं।
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किसी भी राजनीतिज्ञ को सदस्य नहीं बनाया जाना था। तीन पदों के लिए तीन लोगों के नाम कमेटी को सुझाने थे। सरकार के पास पूरे अधिकार हैं कि इन पदों को भर सके। अध्यक्ष का पद अक्तूबर 2015 से नहीं भरा गया है।
उपभोक्ता शिकायत निवारण केंद्र में भी सरकार को अध्यक्ष व अन्य सचिव नियुक्त करने थे। मौजूदा याचिका में भी बीमा कंपनी के संबंधी शिकायतों का निवारण करना था। कमेटी का गठन नहीं हुआ और पद खाली हैं।
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खंडपीठ ने कहा कि अभी तक सरकार ने स्टेट कमीशन का गठन नहीं किया है। सरकार की मुख्य सचिव, कानूून सचिव, सीएपीडी विभाग के सचिव की कमेटी ने स्टेट कमीशन में अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। कोर्ट ने पहले 30 दिन और बाद 15 दिन का समय दिया कि वह सदस्यों की नियुक्ति कर दे। साथ ही अब कोई भी समय दिए बगैर आपत्तियां पेश करने के आदेश दिए गए।
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राज्य जवाबदेह आयोग, राज्य मानव अधिकार आयोग आदि में चेयरमैन और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जानी थी। मुख्य सचिव, कानून विभाग सचिव और सीएपीडी विभाग के सचिव अपने कार्यालयों में हैं।
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किसी भी राजनीतिज्ञ को सदस्य नहीं बनाया जाना था। तीन पदों के लिए तीन लोगों के नाम कमेटी को सुझाने थे। सरकार के पास पूरे अधिकार हैं कि इन पदों को भर सके। अध्यक्ष का पद अक्तूबर 2015 से नहीं भरा गया है।
उपभोक्ता शिकायत निवारण केंद्र में भी सरकार को अध्यक्ष व अन्य सचिव नियुक्त करने थे। मौजूदा याचिका में भी बीमा कंपनी के संबंधी शिकायतों का निवारण करना था। कमेटी का गठन नहीं हुआ और पद खाली हैं।