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ऑपरेशन महादेव: पहलगाम के गुनहगारों के पाकिस्तानी होने के सबूत, मारे गए आतंकियों की राइफल-खोखों ने भी उगला राज
Tue, 05 Aug 2025 09:20 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 05 Aug 2025 09:20 AM IST
सार
कुलगाम में ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीनों आतंकियों के बायोमीट्रिक डेटा सहित राष्ट्रीयता के सबूत सुरक्षा एजेंसियों के पास हैं। पहलगाम के गुनहगारों के पाकिस्तानी होने के सबूत मिले हैं। मारे गए आतंकवादियों में ए प्लस प्लस श्रेणी के आतंकवादी, मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर सुलेमान शाह उर्फ फैजल जट्ट शामिल था।
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ऑपरेशन महादेव के दौरान श्रीनगर के बाहरी इलाके में मुठभेड़ स्थल के पास तैनात सुरक्षाबल।
- फोटो : बसित जरगर
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विस्तार
सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीनों आतंकियों के पाकिस्तानी होने के पुख्ता सबूत जुटाए हैं। बायोमीट्रिक डेटा और पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी दस्तावेज बताते हैं कि 28 जुलाई को दाछीगाम के जंगल में मारे गए लश्कर-ए-ताइबा के तीनों आतंकी पड़ोसी मुल्क के ही नागरिक थे।
ये आतंकवादी 22 अप्रैल को पहलगाम के बायसरन मैदान में हमले के बाद से दाछीगाम-हारवन वन क्षेत्र में छिपे हुए थे। अफसरों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण (एनएडीआरए) के बायोमीट्रिक रिकॉर्ड, मतदाता पहचान पत्र और डिजिटल सैटेलाइट फोन डेटा (लॉग और जीपीएस वे-पॉइंट) जैसे अहम सबूत जुटाए हैं।
ये साक्ष्य तीनों आतंकवादियों की पाकिस्तानी राष्ट्रीयता की पुष्टि करते हैं। मुठभेड़ के बाद की जांच, बैलिस्टिक जांच और हिरासत में लिए गए दो कश्मीरी मददगारों के बयान ने पहलगाम हमले में आतंकवादियों की संलिप्तता की पुष्टि हुई।
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अफसरों ने बताया कि पहली बार हमारे पास पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी दस्तावेज हैं जो पहलगाम हमलावरों की राष्ट्रीयता को संदेह से परे साबित करते हैं। पहलगाम में गोलीबारी करने वाली टीम में कोई भी कश्मीरी शामिल नहीं था।
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ये आतंकवादी 22 अप्रैल को पहलगाम के बायसरन मैदान में हमले के बाद से दाछीगाम-हारवन वन क्षेत्र में छिपे हुए थे। अफसरों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण (एनएडीआरए) के बायोमीट्रिक रिकॉर्ड, मतदाता पहचान पत्र और डिजिटल सैटेलाइट फोन डेटा (लॉग और जीपीएस वे-पॉइंट) जैसे अहम सबूत जुटाए हैं।
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ये साक्ष्य तीनों आतंकवादियों की पाकिस्तानी राष्ट्रीयता की पुष्टि करते हैं। मुठभेड़ के बाद की जांच, बैलिस्टिक जांच और हिरासत में लिए गए दो कश्मीरी मददगारों के बयान ने पहलगाम हमले में आतंकवादियों की संलिप्तता की पुष्टि हुई।
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अफसरों ने बताया कि पहली बार हमारे पास पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी दस्तावेज हैं जो पहलगाम हमलावरों की राष्ट्रीयता को संदेह से परे साबित करते हैं। पहलगाम में गोलीबारी करने वाली टीम में कोई भी कश्मीरी शामिल नहीं था।
यह अहम साक्ष्य मिले
मारे गए आतंकवादियों में ए प्लस प्लस श्रेणी के आतंकवादी, मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर सुलेमान शाह उर्फ फैजल जट्ट शामिल था। अन्य दो आतंकी उसके करीबी सहयोगी ए-ग्रेड कमांडर अबू हमजा उर्फ अफगान और यासिर उर्फ जिब्रान थे। हथियारों के साथ, सुरक्षाबलों ने शाह और हमजा की जेबों से पाकिस्तान चुनाव आयोग की ओर से जारी दो लैमिनेटेड मतदाता पर्चियां बरामद हुईं। यह मतदाता क्रमांक क्रमशः लाहौर (एनए-125) और गुजरांवाला (एनए-79) की मतदाता सूचियों से संबंधित हैं।
मारे गए आतंकवादियों में ए प्लस प्लस श्रेणी के आतंकवादी, मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर सुलेमान शाह उर्फ फैजल जट्ट शामिल था। अन्य दो आतंकी उसके करीबी सहयोगी ए-ग्रेड कमांडर अबू हमजा उर्फ अफगान और यासिर उर्फ जिब्रान थे। हथियारों के साथ, सुरक्षाबलों ने शाह और हमजा की जेबों से पाकिस्तान चुनाव आयोग की ओर से जारी दो लैमिनेटेड मतदाता पर्चियां बरामद हुईं। यह मतदाता क्रमांक क्रमशः लाहौर (एनए-125) और गुजरांवाला (एनए-79) की मतदाता सूचियों से संबंधित हैं।
एक माइक्रो-एसडी में तीनों व्यक्तियों के एनएडीआरए बायोमीट्रिक रिकॉर्ड थे, जो उनकी पाकिस्तानी नागरिकता और चंगा मंगा (कसूर जिला) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट के पास कोइयन गांव में उनके पते की पुष्टि करते हैं। पाकिस्तान में निर्मित कैंडीलैंड और चोकोमैक्स चॉकलेट के रैपर भी मिले। रैपरों पर छपे लॉट नंबर मई 2024 में मुजफ्फराबाद, पीओके भेजे गए एक माल के थे।
राइफलों और खोखों ने भी उगला राज
अधिकारियों ने बताया कि बायसरन में मिले 7.62x39 मिमी के खोखों का 28 जुलाई को जब्त की गई तीन एके-103 राइफलों पर परीक्षण किया गया जिनमें धारियों के निशान 100 प्रतिशत मेल खाते पाए गए। पहलगाम में मिली एक फटी हुई कमीज पर लगे खून की प्रोफाइल तीनों आतंकवादियों के शवों के डीएनए से मेल खाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि बायसरन में मिले 7.62x39 मिमी के खोखों का 28 जुलाई को जब्त की गई तीन एके-103 राइफलों पर परीक्षण किया गया जिनमें धारियों के निशान 100 प्रतिशत मेल खाते पाए गए। पहलगाम में मिली एक फटी हुई कमीज पर लगे खून की प्रोफाइल तीनों आतंकवादियों के शवों के डीएनए से मेल खाते हैं।
हिरासत में लिए गए दो मददगारों परवेज और बशीर अहमद जोथर ने बताया कि 21 अप्रैल को आतंकी बायसरन से दो किलोमीटर दूर हिल पार्क में एक ढोक में रहने चले गए, जहां उन्हें रातभर पनाह दी और अगले दिन हमला करने के लिए बायसरन जाने से पहले उन्हें खाना दिया।
गोलीबारी की लोकेशन की भी पुष्टि
आतंकी सुलेमान शाह के गार्मिन उपकरण (जीपीएस नेविगेशन से जुड़ा उपकरण) से बरामद जीपीएस वे-पॉइंट प्रत्यक्षदर्शियों की बताई गई गोलीबारी की लोकेशन से सटीक मेल खाते हैं। घटनास्थल पर मिले कारतूस के खोल मुठभेड़ के बाद आतंकवादियों से बरामद तीन राइफलों से मेल खाते हैं। हुआवेई सैटेलाइट फोन 22 अप्रैल से 25 जुलाई के बीच हर रात इनमारसैट-4 एफ1 पर पिंग करता पाया गया था।
आतंकी सुलेमान शाह के गार्मिन उपकरण (जीपीएस नेविगेशन से जुड़ा उपकरण) से बरामद जीपीएस वे-पॉइंट प्रत्यक्षदर्शियों की बताई गई गोलीबारी की लोकेशन से सटीक मेल खाते हैं। घटनास्थल पर मिले कारतूस के खोल मुठभेड़ के बाद आतंकवादियों से बरामद तीन राइफलों से मेल खाते हैं। हुआवेई सैटेलाइट फोन 22 अप्रैल से 25 जुलाई के बीच हर रात इनमारसैट-4 एफ1 पर पिंग करता पाया गया था।
जम्मू और कश्मीर पुलिस ने 24 अप्रैल को तीन लोगों - हाशिम मूसा, अली भाई उर्फ तल्हा और स्थानीय आदिल हुसैन थोकर के स्केच जारी किए। हालांकि 28 जुलाई की मुठभेड़ के बाद, एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि ये स्केच दिसंबर 2024 की एक अन्य गोलीबारी के दौरान मिले एक फोन से मिली तस्वीर पर आधारित थे और वास्तविक हमलावर अलग थे।
पाकिस्तानी साजिद सैफुल्लाह था हमले का मुख्य संचालक
अधिकारियों ने बताया कि लाहौर के चंगा मंगा निवासी लश्कर-ए-ताइबा के दक्षिण-कश्मीर का ऑपरेशन प्रमुख साजिद सैफुल्लाह जट्ट ही हमले का मुख्य संचालक था, क्योंकि बरामद सैटेलाइट फोन से उसकी आवाज के नमूने उसकी पहले पकड़ी गई कॉल से मेल खाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि लाहौर के चंगा मंगा निवासी लश्कर-ए-ताइबा के दक्षिण-कश्मीर का ऑपरेशन प्रमुख साजिद सैफुल्लाह जट्ट ही हमले का मुख्य संचालक था, क्योंकि बरामद सैटेलाइट फोन से उसकी आवाज के नमूने उसकी पहले पकड़ी गई कॉल से मेल खाते हैं।
लश्कर-ए-ताइबा के रावलकोट प्रमुख रिजवान अनीस ने 29 जुलाई को मारे गए हमलावरों के परिवारों से गायबाना नमाज-ए-जनाजा (अनुपस्थिति में जनाज़ा) आयोजित करने के लिए मुलाकात की थी और इसकी फुटेज अब भारतीय डोजियर का हिस्सा हैं।