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J&K: 13 और जिलों में खुलेंगे वन स्टाप सेंटर, हिंसा पीड़ित महिलाओं को मिलेगी मेडिकल और लीगल मदद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 13 Oct 2018 03:22 PM IST
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- फोटो : Demo Pic
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हिंसा पीड़ित महिलाओं की मदद को रियासत में 13 और वन स्टाप सेंटर (ओएससी) खुलने जा रहे हैं। इसके लिए केंद्र के महिला विकास एवं बाल कल्याण मंत्रालय की ओर से 5.65 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। इन सेंटरों के साथ ही रियासत में कुल ओएससी की संख्या 22 को जाएगी। जिन जिलों में यह सेंटर खुलने हैं उनमें सांबा, उधमपुर, पुंछ, रियासी, रामबन, किश्तवाड़, पुलवामा, बडगाम, गांदरबल, बारामुला, शोपियां, कुलगाम और कारगिल शामिल हैं।
सचिव समाज कल्याण डॉ. फारूक अहमद लोन के मुताबिक रियासत सरकार की ओर से इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया था। इन सेंटरों के जरिये निजी या सार्वजनिक स्थलों, परिवार के साथ समुदाय या कार्य स्थल पर हिंसा से पीड़ित महिलाओं को मदद मुहैया कराई जाएगी। इसमें उम्र, वर्ग जाति, शैक्षिक स्टेटस से परे सभी को जरूरत के आधार पर मेडिकल, लीगल, साइकोलाजिकल, काउंसिलिंग से जुड़ी मदद दी जाएगी। एसिड अटैक, घरेलू हिंसा, ऑनर क्राइम जैसे मसलों में महिलाओं को खासतौर पर राहत होगी।
इमरजेंसी और नॉन इमरजेंसी दोनों आधार पर मदद मिलेगी। इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के नेटवर्क से सपोर्ट हासिल किया जाएगा। पीड़िता को गाइड लाइन के मुताबिक मेडिकल एड, जांच की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। अगर पीड़ित महिला चाहे तो वह वीडियो कांफ्रेंसिंग या ऑडियो के जरिये पुलिस, कोर्ट में अपने बयान दर्ज करा सकेगी। एनजीओ की मदद से उनके आवास की भी व्यवस्था की जाएगी।
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सचिव समाज कल्याण डॉ. फारूक अहमद लोन के मुताबिक रियासत सरकार की ओर से इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया था। इन सेंटरों के जरिये निजी या सार्वजनिक स्थलों, परिवार के साथ समुदाय या कार्य स्थल पर हिंसा से पीड़ित महिलाओं को मदद मुहैया कराई जाएगी। इसमें उम्र, वर्ग जाति, शैक्षिक स्टेटस से परे सभी को जरूरत के आधार पर मेडिकल, लीगल, साइकोलाजिकल, काउंसिलिंग से जुड़ी मदद दी जाएगी। एसिड अटैक, घरेलू हिंसा, ऑनर क्राइम जैसे मसलों में महिलाओं को खासतौर पर राहत होगी।
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इमरजेंसी और नॉन इमरजेंसी दोनों आधार पर मदद मिलेगी। इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के नेटवर्क से सपोर्ट हासिल किया जाएगा। पीड़िता को गाइड लाइन के मुताबिक मेडिकल एड, जांच की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। अगर पीड़ित महिला चाहे तो वह वीडियो कांफ्रेंसिंग या ऑडियो के जरिये पुलिस, कोर्ट में अपने बयान दर्ज करा सकेगी। एनजीओ की मदद से उनके आवास की भी व्यवस्था की जाएगी।
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