कश्मीर हिंसा: एक और मौत, सात नागरिक और 12 सुरक्षा बलों के जवान घायल
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कश्मीर हिंसा में सोमवार को एक और युवक की मौत हो गई। घाटी में अब भी हिंसा जारी है। सोमवार को भी कई स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं। इस बीच श्रीनगर के छह थाना क्षेत्रों तथा अनंतनाग में कर्फ्यू है। अन्य स्थानों पर कड़ी पाबंदियां हैं।
दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में शुक्रवार को हुए हिंसक प्रदर्शन में घायल एक युवक की सोमवार को मौत हो गई। अनंतनाग के बिजबिहाड़ा क्षेत्र के सेमथान गांव के पास प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जाम कर रखा था। इस दौरान वे आवश्यक खाद्य सामग्री लेकर जा रहे वाहनों में तोड़फोड़ कर रहे थे।
सूचना पाकर पुलिस पहुंची तो प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और पेलेट गन चलाए गए। इसमें दो महिलाओं सहित सात लोग घायल हो गए। इसमें दो की हालत गंभीर बताई जाती है। पथराव में सुरक्षा बलों के 12 जवान घायल भी हुए हैं।
पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक के लिए नेकां ने मार्च निकाला
उधर, श्रीनगर के छह थाना क्षेत्रों नौहट्टा, खानयार, रैनावारी, सफाकदल, महाराजगंज तथा बटमालू में कर्फ्यू है। अनंतनाग में भी कर्फ्यू जारी है। पुलिस के अनुसार अन्य जगहों पर कड़ी पाबंदियां हैं। चार या चार से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक है। अलगाववादियों के बंद की वजह से सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
बाजार तथा दुकानें बंद हैं। सड़कों से वाहन गायब हैं। मोबाइल इंटरनेट तथा रेल सेवा ठप है। इस बीच हुर्रियत के सचिवालय, डीसी दफ्तर तथा तहसील कार्यालय जाने वाले रास्तों को जाम कर सरकारी कर्मचारियों को न जाने देने के आह्वान का असर नहीं दिखा।
पेलेट गन के इस्तेमाल के विरोध में महाराजा हरि सिंह अस्पताल की नर्स तथा पैरा मेडिकल स्टाफ ने भी प्रदर्शन किया। उन्होंने इसके इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। नेशनल कांफ्रेंस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के खिलाफ काली पट्टियां बांधकर पार्टी मुख्यालय से जुलूस निकाला, लेकिन सुरक्षा बलों ने टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर से उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।
इस पर उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पार्टी के महासचिव अली मोहम्मद सागर का कहना है कि सरकार को पेलेट गन का इस्तेमाल बंद करना चाहिए। साथ ही बातचीत की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
कानून-व्यवस्था में सेना की ली जा सकती है मदद
श्रीनगर और बडगाम को छोड़कर घाटी के अन्य जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए सेना की मदद ली जा सकती है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। सोमवार की सुबह सोपोर में सेना की तैनाती किए जाने की खबर आई थी, लेकिन पुलिस का कहना है कि सेना को नहीं बुलाया गया है।
ज्ञात हो कि कुछ दिनों पहले नार्दर्न कमांड के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से मिलकर हर संभव मदद का भरोसा दिया था। इसलिए माना जा रहा है कि अब सेना को कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने में लगाया जा सकता है।