बिजली परियोजनाओं के लिए एक लाख करोड़
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रियासत के इतिहास में पहली बार आम बजट के साथ बिजली बजट को पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने अलग से पेश किया। वित्त मंत्री हसीब ए द्राबू के बिजली बजट में कुल 57 पनबिजली परियोजनाओं के लिए एक लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का रोड मैप तैयार किया गया है। 9344.50 मेगावाट के पनबिजली उत्पादन के लक्ष्य को 12वीं और 13वीं पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान हासिल किया जाना है।
बजट में राज्य, केंद्र, संयुक्त उद्यम और प्राइवेट सेक्टर में रियासत की आंकी गई कुल पनबिजली उत्पादन क्षमता करीब बीस हजार मेगावाट का 9344.50 मेगावाट हासिल करने के लिए राज्य सेक्टर में 6263 मेगावाट के 15 परियोजनाओं जिसमें संयुक्त उद्यम में 2220 मेगावाट की तीन परियोजनाएं भी शामिल हैं, के लिए करीब 60 हजार करोड़ के निवेश की जरूरत दर्शाई गई है।
इन साठ हजार करोड़ में से 18 हजार करोड़ की राशि को इक्विटी से हासिल करने का रोड मैप बनाया गया है। इसके साथ ही केंद्रीय सेक्टर में रियासत में मौजूदा समय में हासिल हो रहे 2009 मेगावाट पनबिजली उत्पादन में 12 फीसदी मुफ्त बिजली के हिस्से को बढ़ाने पर भी बिजली बजट में जोर दिया गया है। इसके लिए रियासती सरकार मामले को जोरशोर से संबंधित पक्षों से उठाएगी।
बिजली क्षेत्र को चार हजार करोड़ का घाटा
बिजली क्षेत्र में रियासत सरकार को मौजूदा वित्त वर्ष में करीब 4000 करोड़ का घाटा होने का अनुमान है। वित्त मंत्री हसीब ए द्राबू की ओर से पेश किए गए बिजली बजट में जो तस्वीर पेश की गई हैं, उसमें रियासत सरकार फरवरी 2015 तक बिजली खरीद के लिए 4782.36 करोड़ की राशि कर चुकी है। इसमें अभी मार्च महीने को जोड़ा नहीं गया है।
वहीं फरवरी तक रियासती सरकार ने बिजली राजस्व के तौर पर 1527.67 करोड़ ही हासिल किए है। बिजली बजट में बताया गया हैं कि रियासत में बिजली क्षेत्र से राजस्व का लक्ष्य 2390 करोड़ रखा गया था, लेकिन सितंबर 2014 में आई बाढ़ में हुए नुकसान से बिजली राजस्व का भी कबाड़ा हुआ है और फरवरी 2015 तक केवल 1527 करोड़ ही हासिल हो पाया है।
बिजली क्षेत्र में हो रहे नुकसान के लिए उपभोक्ताओं की ओर से एग्रीमेंट लोड से ज्यादा बिजली खर्च करने, सुरक्षा बलों के लिए नान कैंप अस्थायी केंद्रों में पंजीकृत कनेक्शन के बिना ही बिजली खर्च करने, विस्थापितों शिविरों में बिजली खर्च का किराया न मिलने, नगर निगम और स्थानीय निकायों के क्षेत्राधिकार में स्ट्रीट लाइटों आदि का बिजली खर्च का किराया न मिलने के अलावा सरकारी विभागों से भी बिजली का पूरा किराया न मिलना बताया गया है।
बिजली बजट की झलकियां
- बीस हजार मेगावाट पनबिजली क्षमता को हासिल करने की बाधाओं को दूर करना।
- लद्दाख में सोलर पावर की करीब 7500 मेगावाट की क्षमता को हासिल करने की तरफ कदम बढ़ाना।
- केंद्रीय परियोजनाओं में 12 फीसदी मुफ्त बिजली के हिस्से को बढ़ाना।
- ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन के ढांचे को मजबूत करना।
- प्रधानमंत्री पुनर्निर्माण योजना के तहत बिजली की 73 परियोजनाओं पर काम पूरा करना।
- बिजली विभाग में टीएंडडी विंगों को बांटना।
- एचटी और एलटी सिस्टम को मजबूत और सुधार लाना।
- एटीएंडसी लासिस को कम करने के लिए आरएपीडीआरपी प्रोजेक्ट को सही ढंग से लागू करने।
बिजली बजट में ये भी है खास
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना के तहत बिना बिजली के गांवों में बिजली पहुंचाना।
- ट्रांसफार्मर बैंकों को मजबूत करना।
- मीटर टेस्टिंग सुविधा मुहैया करवाना।
- बिजली घाटे को कम करना।
- बिजली सप्लाई में सूचना तकनीक के प्रयोग।
- पावर सेक्टर में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट को लागू करने।
- अनियमित बिजली कनेक्शनों को नियमित करना।