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तालिबानियों से बात की जा सकती है तो फिर अलगाववादियों से बातचीत की पहल क्यों नहीं: उमर-महबूबा
Thu, 10 Jan 2019 04:51 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 10 Jan 2019 04:51 AM IST
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omar abdullah and mehbooba mufti
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादियों से बातचीत की वकालत की है। आश्चर्य व्यक्त किया कि अगर सेना प्रमुख बिपिन रावत अफगानिस्तान में तालिबान से बात करने की वकालत कर सकते हैं तो केंद्र कश्मीर में अलगाववादियों से बातचीत की पहल क्यों नहीं करती।
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उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया कि हम तालिबान के साथ वार्ता, तिब्बत और श्रीलंका के तमिल क्षेत्रों की स्वायत्तता की वकालत करते हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर में किसी संवाद या राजनीतिक पहल के इच्छुक नहीं हैं। सवाल किया कि हमारी नीति ऐसी क्यों है कि जैसा कि हम कहते हैं वैसा करो लेकिन जैसा हम करते हैं वैसा ना करो। तालिबान के लिए बातचीत, कश्मीर के लिए ऑपरेशन ऑल आउट।
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महबूबा ने ट्वीट किया कि अगर सेना प्रमुख तालिबान के साथ वार्ता की वकालत कर सकते हैं तो हमारे अपने लोगों की बात आने पर अलग मानदंड क्यों अपनाए जाते हैं। केंद्र को पाकिस्तान की ओर से बातचीत की पेशकश स्वीकार करनी चाहिए और राज्य में हिंसा को खत्म करने के लिए हुर्रियत कांफ्रें स के साथ भी वार्ता की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर में हिंसा के दुष्चक्र को खत्म करने के लिए हुर्रियत और अन्य पक्षकारों के साथ वार्ता की पहल भी करनी चाहिए।
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ज्ञात हो कि सेना प्रमुख ने दिल्ली में रायसीना डायलॉग में अफ गानिस्तान की शांति प्रक्रिया पर कहा था कि तालिबान से बातचीत होनी चाहिए, लेकिन यह बिना किसी शर्त के होनी चाहिए।