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दिल्ली चुनाव के बाद BJP-NC गठबंधन की सरकार संभव

Fri, 09 Jan 2015 01:21 AM IST
Updated Fri, 09 Jan 2015 01:21 AM IST
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omar became the kingmaker in forming new government

रियासत में नई सरकार के गठन में उमर अब्दुल्ला किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। हालिया घटनाक्रम से राज्यपाल शासन की प्रबल संभावना के मद्देनजर यह कयासबाजी तेज हो गई है कि नई सरकार दिल्ली चुनाव के बाद नेशनल कांफ्रेंस के सहयोग से भाजपा बनाएगी। बाकी का संख्याबल निर्दलीय विधायक पूरा करेंगे।

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विधानसभा चुनाव में पीडीपी को 28, भाजपा को 25, नेकां को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली हैं। शेष सात सीटों में दो पीपुल्स कांफ्रेंस, एक सीपीआई एम, एक पीडीएफ तथा तीन निर्दलीय के पास हैं। सज्जाद लोन की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का भाजपा को समर्थन माना जाता है।
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सूत्रों का कहना है कि परिणाम के ठीक बाद उमर की दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत हुई थी। इसमें सरकार गठन के तमाम मुद्दों पर प्रारंभिक चर्चा के दौरान यह बात सामने आई थी कि नेकां का उप मुख्यमंत्री होगा।
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मंत्रिमंडल में नेकां कोटे के मंत्री होंगे और दिल्ली की सरकार में भी नुमाइंदगी होगी। इस बीच उमर अपने अस्वस्थ पिता का हालचाल लेने लंदन चले गए थे।

लगभग 12 दिनों बाद वे स्वदेश लौटे तो उन्होंने राज्यपाल एनएन वोहरा से दिल्ली में मिलकर कार्यकारी मुख्यमंत्री पद के दायित्व से मुक्त करने का आग्रह कर सियासी बवंडर मचा दिया।

भाजपा नेताओं से हुई थी प्रारंभिक बातचीत

omar became the kingmaker in forming new government

उमर के विदेश जाने के बाद पीडीपी से भाजपा नेताओं की बातचीत परवान चढ़ने लगी। पीडीपी की ओर से छह शर्तें भाजपा के समक्ष रखी गईं। सूत्रों का कहना है कि ये शर्तें भगवा खेमे की विचारधारा से मेल नहीं खाती हैं। इस वजह से दोनों पक्षों में टेबुल स्तर पर बातचीत शुरू नहीं हो पाई। धीरे-धीरे एक पखवाड़े का समय बीत गया और अब भी ठोस बातचीत का ही इंतजार है।

पहली बार 25 सीटें हासिल करने वाली भाजपा मानती है कि उसे सरकार बनाने के लिए जनादेश मिला है। इस लिहाज से पिछले दिनों राज्य की कोर कमेटी ने अमित शाह से मिलकर साफ तौर पर यह संदेश दे दिया था कि भाजपा कोटे का ही मुख्यमंत्री होना चाहिए।  

सियासी पंडितों का मानना है कि नए समीकरण इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि नेकां के 15 सदस्यों और चार निर्दलीयों के बल पर भाजपा दिल्ली चुनाव के बाद सरकार बनाएगी। पीपुल्स कांफ्रेंस के दो विधायकों तथा दो निर्दलीय भाजपा के पक्ष में हैं।

उधर, सूत्रों का यह भी कहना है कि दिल्ली चुनाव की घोषणा वीरवार को हो सकती है। इस बीच ओबामा के दौरे के चलते प्रधानमंत्री मोदी के व्यस्त रहने के कारण पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की मुलाकात संभव नहीं हैं। इन सब वजहों से सरकार गठन पर फैसला दिल्ली चुनाव के बाद ही होगा। तब तक रियासत में राज्यपाल शासन रहेगा।

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