शोपियां प्रकरण की जांच को उच्च स्तरीय एसआईटी गठित होः उमर अब्दुल्ला
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में शोपियां प्रकरण पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि अब तो एफआईआर की लड़ाई शुरू हो गई है। एक ही थाने में पुलिस और सेना दोनों की एफआईआर है। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण में इंसाफ का भरोसा दिलाया है।
उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने की मांग की, जो सेना तथा पुलिस दोनों के एफआईआर की निष्पक्ष रूप से जांच करे। ज्ञात हो कि सेना के काफिले पर पथराव के बाद फायरिंग में तीन युवकों की मौत हो गई थी।
गृह विभाग, जीएडी तथा योजना विभाग के ग्रांट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए उमर ने कहा कि शोपियां मामले में दो एफआईआर होने से संबंधित एसएचओ को जांच करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व में सेना के खिलाफ दर्ज मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
ट्रैक रिकार्ड काफी खराब है। वर्ष 2002 से 50 मामले केंद्र सरकार के पास भेजे गए। इनमें से 47 को खारिज कर दिया गया, जबकि तीन मामले लंबित हैं। जिन मामलों में कार्रवाई हुई वह सब सेना ने किया, बाद में यह भी रिवर्स गियर में चलने लगा।
चुनाव के प्रति लोगों में विश्वास कायम नहीं करा पा रही सरकार
उनके विधानसभा क्षेत्र में श्रीनगर लोकसभा उप चुनाव के दौरान फारूक अहमद डार नामक युवक को सेना के वाहन पर रस्सी से बांधकर घुमाया गया। वह वोट डालकर निकला था। राज्य मानवाधिकार आयोग ने उसे मुआवजा देने की बात कही, लेकिन वह भी नहीं दिया गया।
इसका कारण भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। अच्छा होता कि वह पत्थरबाज होता। कम से कम हुर्रियत वाले तो उसका साथ देते। एक वोटर के साथ हुई नाइंसाफी में तो इंसाफ दिला नहीं सके, फिर कैसे विश्वास जगेगा। कहा कि कठुआ में लापता नाबालिग बच्ची की अब तक मेडिकल रिपोर्ट नहीं आई है तो फिर जांच कैसे शुरू होगी। जल्द से जल्द मेडिकल रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए।
फैसले का एलान रियासती सरकार ही करे
उमर ने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी तथा इस संस्था की गरिमा का ख्याल रखा जाना चाहिए। फैसलों का एलान केंद्र से न होकर मुख्यमंत्री की ओर से किया जाना चाहिए। कहा कि पत्थरबाजों को छोड़ने का एलान केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने किया।
फिर राज्य सरकार ने पहल की। केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में सात सूत्रीय फार्मूले का एलान किया। रियासत और रियासती फैसले का एलान मुख्यमंत्री के द्वारा ही होना चाहिए न कि मरकजी सरकार द्वारा। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजों की एमेनस्टी पर भी कुछ स्पष्ट नहीं है।
इस पर नहीं जाऊंगा कि यह फरमान कहां से आया। कहा गया कि पहली बार पत्थरबाजी में शामिल युवाओं से मुकदमा हटेगा, फिर कहा गया कि दूसरी बार वालों को भी माफी मिलेगी। इसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।