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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Omar Abdullah took a dig at the government

NEET का मामला ले रहा राजनीतिक रंग, उमर ने राज्य सरकार पर साधा निशान

Tue, 03 May 2016 10:55 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Tue, 03 May 2016 10:55 PM IST
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Omar Abdullah took a dig at the government
उमर अब्दुल्ला नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष हैंं। - फोटो : PTI
एनआईटी के बाद एक और विवाद घाटी पर मंडराता दिख रहा है। ताजा मामला है एनईईटी (नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट) की परीक्षा का। सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के अनुसार अन्य राज्यों की तरह राज्य में भी एमबीबीएस सीटों के लिए केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा होगी। इस निर्णय पर विद्यार्थियों ने असंतुष्टि जताई गई है। वहीं यह मामला भी सियासी रंग लेता दिखाई दे रहा है।
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एनईईटी मामले को लेकर नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने राज्य सरकार पर निशान साधा है। उन्होंने कहा कि एनईईटी हमारे छात्रों के हितों के खिलाफ है और स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और भावनाओं के खिलाफ जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की लापरवाही और इस मुद्दे से निपटने में गंभीरता की कमी की भावना को दर्शाती है।
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उमर के अनुसार छात्रों के मन में आशंका और चिंता पैदा कर दी गई है कि कब उन्हें शैक्षणिक गतिविधियों और आगामी प्रवेश परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अलगाववादी संगठनों द्वारा भी विरोध दर्ज कराया जा रहा।
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'जम्मू-कश्मीर में एनईईटी लागू करना एक साजिश'

Omar Abdullah took a dig at the government
neet exam - फोटो : Amar Ujala
मामले पर कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में एनईईटी लागू करना एक साजिश है। उन्होंने कहा कि जैसे कश्मीर के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (आरईसी) को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में तब्दील किया गया, वैसे ही अब यह भी थोपा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनईईटी के पहले चरण की परीक्षा रविवार को देश भर में आयोजित की गई थी। दूसरा चरण 24 जुलाई के लिए निर्धारित है। यह घोषणा घाटी में इच्छुक छात्रों के बीच असमंजस का बड़ा कारण बनी हुई है। 

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (श्रीनगर) के एक छात्र का कहना है कि घाटी में पहले से ही डाक्टरों की कमी है अगर इसे राष्ट्रीय स्तर से जोड़ा जाता है, तो जो बाहर से आएगा वह अपनी पढ़ाई कर वापस चला जाएगा। इससे  घाटी में डॉक्टरों की कमी बनी रहेगी। इस संकट को देखते हुए राज्य सरकार दुविधा में पड़ गई है।

​राज्य सरकार ने इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, ताकि जम्मू कश्मीर को इस परीक्षा से छूट मिले। अपनी याचिका में राज्य ने अपेक्स अदालत के सामने अनुच्छेद 370 का हवाला दिया है। अब देखना होगा कि अदालत क्या निर्णय लेती है, क्योंकि यह मुद्दा भी घाटी में राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। मामले में अगली सुनवाई गुरुवार को होनी है। 
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