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Jammu kashmir News : अब जम्मू में हो जाएगी नए वेरिएंट की पहचान, सैंपल नहीं भेजने पड़ेंगे दिल्ली
Sun, 24 Jul 2022 04:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 24 Jul 2022 04:03 AM IST
सार
एमसीएच गांधीनगर और जीएमसी जम्मू में स्थापित होंगी जीनोम सीक्वेसिंग मशीनें। दिल्ली से रिपोर्ट आने में लग जाता था एक महीना।
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जीनोम सीक्वेंसिंग
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
कोरोना जैसी संक्रमित बीमारियों के नए वेरिएंट की पहचान के लिए अब दिल्ली के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमसीएच गांधीनगर (जच्चा-बच्चा अस्पताल) और जीएमसी जम्मू में अत्याधुनिक जीनोम सीक्वेंसिंग मशीनें स्थापित की जा रही हैं। एमसीएच में एक मशीन पहुंच चुकी है, जबकि जीएमसी में लैब तैयार की जा रही है। इन मशीनों के स्थापित होने से जल्द वेरिएंट की पहचान कर रोगियों को उचित उपचार दिया जा सकेगा। दिल्ली भेजे जाने वाले नमूनों की रिपोर्ट एक माह बाद मिलती है।
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नए वेरिएंट की पहचान करने की प्रणाली में कुल संक्रमित मामलों में से अलग-अलग पांच प्रतिशत आरटी-पीसीआर के नमूने लिए जाते हैं, जिनकी जेनेटिक सीक्वेंसिंग जांच की जाती है। देशभर के विभिन्न हिस्सों में अब तक कोरोना के अल्फा, बीटा, डेल्टा, डेल्टा प्लस, ओमिक्रॉन वेरिएंट मिल चुके हैं। डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरिएंट अधिक खतरनाक रहा है। ओमिक्रॉन के नए वेरिएंट भी तेजी से संक्रमण फैलाते हैं। ऐसे वेरिएंट की पहचान देरी से होने पर बीमारी की रोकथाम में भी देरी हो रही है, जिससे संक्रमण का अधिक प्रसार हो जाता है।
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जम्मू-कश्मीर में सामने आए हैं ओमिक्रॉन के नौ वेरिएंट
जम्मू-कश्मीर में ओमिक्रॉन के नौ नए वेरिएंट सामने आ चुके हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन एक तरह से वायरस का बायोडेटा होता है। वायरस कैसा है, किस तरह से दिखता है, यह जानकारी उसके जेनेटिक से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जेनेटिक (जीनोम) कहा जाता है। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है। जम्मू में जीनोम सीक्वेंसिंग मशीनें लगने से संभाग समेत प्रदेश के सभी जिलों को लाभ मिलेगा। इससे भविष्य में कोविड जैसी बीमारियों का समय पर रोगी देखभाल प्रबंधन को मजबूत बनाया जा सकेगा।
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एमसीएच गांधीनगर (जम्मू) में जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन पहुंच गई है और जीएमसी जम्मू के माइक्रो बायोलॉजी विभाग में भी जल्द एक मशीन आ रही है। इन मशीनों को जल्द शुरू करने की योजना है। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन मशीनों से संक्रमित बीमारियों का पता लगाने और मरीजों की उचित देखभाल में मजबूती मिलेगी।
-डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू