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कच्छ नहीं जाएगा कोई पुलिस अधिकारी
Updated Fri, 18 Dec 2015 07:32 PM IST
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शुक्रवार से गुजरात के कच्छ में शुरू हो रही तीन दिवसीय राष्ट्रीय पुलिस मीट में रियासत का कोई अफसर शामिल नहीं होगा। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद जिनके पास गृह मंत्रालय का चार्ज भी है।
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उन्होंने पुलिस महानिदेशक के राजेंद्रा कुमार और पुलिस महानिरीक्षक (सीआईडी) को पुलिस मीट में शामिल होने की इजाजत नहीं दी। 1990 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि राष्ट्रीय पुलिस मीट में रियासत का प्रतिनिधित्व करने कोई भी पुलिस अधिकारी शामिल नहीं होगा।
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बताया जा रहा है कि इस पुलिस मीट में देश भर के 100 से अधिक पुलिस अधिकारी शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि इस पुलिस मीट के दौरान तीनों दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे और अफसरों से मंत्रणा करेंगे।
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मुफ्ती ने भेजने से किया इंकार
माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री रियासत में कानून और व्यवस्था से नाखुश हैं। खासतौर पर कुपवाड़ा से तीन युवाओं के लापता होने का मामला भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो आगामी कैबिनेट बैठक में पुलिस विभाग में भारी फेरबदल की भी संभावना है। इसके चलते भी पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी को पुलिस मीट में शामिल होने की
इजाजत नहीं दी गई।
कच्छ कांफ्रेंस (पुलिस मीट) में देश भर के पुलिस चीफ, अर्द्धसैनिक बलों के उच्चाधिकारी, इंटेलिजेंस एजेंसियों के अधिकारी देश में बने हालात और सीमा पार की चुनौतियों पर चर्चा कर अपने सुझाव
रखेंगे।
इसके साथ ही कांफ्रेंस में युवाओं के मुख्यधारा से भटकने के अहम मुद्दे पर भी चर्चा होगी। पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर भी चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि दक्षिण कश्मीर के 60 से 70 युवा मुख्यधारा से अलग होकर विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा कश्मीर में अलकायदा और आईएस की मौजूदगी के भी पिछले दिनों संकेत मिले हैं।
सूत्रों की मानें तो आगामी कैबिनेट बैठक में पुलिस विभाग में भारी फेरबदल की भी संभावना है। इसके चलते भी पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी को पुलिस मीट में शामिल होने की
इजाजत नहीं दी गई।
कच्छ कांफ्रेंस (पुलिस मीट) में देश भर के पुलिस चीफ, अर्द्धसैनिक बलों के उच्चाधिकारी, इंटेलिजेंस एजेंसियों के अधिकारी देश में बने हालात और सीमा पार की चुनौतियों पर चर्चा कर अपने सुझाव
रखेंगे।
इसके साथ ही कांफ्रेंस में युवाओं के मुख्यधारा से भटकने के अहम मुद्दे पर भी चर्चा होगी। पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर भी चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि दक्षिण कश्मीर के 60 से 70 युवा मुख्यधारा से अलग होकर विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा कश्मीर में अलकायदा और आईएस की मौजूदगी के भी पिछले दिनों संकेत मिले हैं।