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कश्मीर: आतंकियों को फंडिंग के मामले में NIA को दर्जनभर भगोड़ों की तलाश

Thu, 01 Sep 2016 12:47 PM IST
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 01 Sep 2016 12:47 PM IST
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NIA tracking fugitives
एनआईए - फोटो : File Photo
आतंकी संगठनों तथा आतंकियों को फंडिंग मामले में पिछले पांच साल से भगोड़े लगभग एक दर्जन लोगों की एनआईए को तलाश है। इन पर आरोप है कि पाकिस्तान तथा अन्य देशों से होने वाली फंडिंग का इस्तेमाल घाटी में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जाता रहा है। 
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आतंकियों को फंडिंग मामले में पहले एनआईए ने तीन मामले दर्ज किए हैं। हवाला के जरिये पाक से दिल्ली के रास्ते आतंकी संगठनों को मदद के लिए भेजी जाने वाली राशि के मामले में एनआईए ने 15 अप्रैल 2011 को मुकदमा कायम किया।
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इस मामले में छह में से चार आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए लेकिन दो आरोपी मो. मकबूल पंडित और एजाज अहमद भट उर्फ एजाज मकबूल भट हत्थे नहीं चढ़े तो उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया।
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ओवर ग्राउंड वर्करों पर भी रखी जा रही नजर

NIA tracking fugitives
घाटी में हिंसा - फोटो : PTI
जेएंडके एफेक्टर्स रिलीफ ट्रस्ट (जेकेएआरटी) के नाम पर भी कश्मीर के प्रभावितों को राहत प्रदान करने के नाम पर फंडिंग का इस्तेमाल आतंकियों को मदद पहुंचाने के लिए किया जाता था। इस मामले में 25 अक्टूबर 2011 को मुकदमा कायम किया गया।

छानबीन में यह संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का ही निकला। इस मामले में 12 आरोपियों में से आठ भगोड़े हैं। इसमें सैयद सलाहुद्दीन भी शामिल है। इसके अलावा गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान, उमर फारूक शेरा उर्फ महबूब उल हक, मंजूर अहमद डार उर्फ मसरूर डार, जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद, नजीर अहमद डार उर्फ शब्बीर इलाही, अब्दुल मजीद सोफी उर्फ मजीद बिसाती उर्फ शाहिन तथा मुबारक शाह के नाम है।

जानीपुर थाने में भी वर्ष 2011 में जाली नोट का मामला पकड़ा गया था। इसमें जाली करेंसी नोट के माध्यम से ओवर ग्राउंड वर्कर को मदद पहुंचाने के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि शफीक उल को भगोड़ा घोषित किया गया।

सूत्रों का कहना है कि घाटी में अब एनआईए जब नए सिरे से फंडिंग मामले की तलाश कर रही है तो वह भगोड़ों पर भी नजर रखे हुए है। एनआईए की कोशिश है कि इन पर भी शिकंजा कसा जाए। 
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