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सर की सैलरी के हवाले सरकार का मिड-डे-मील
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Wed, 03 Dec 2014 07:37 PM IST
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जम्मू संभाग के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए मिड-डे-मील के चावल स्कूलों तक पहुंचाना सिरदर्द बन चुका है। शिक्षकों को कैरेज चार्ज जरूरत से कहीं कम मिल रहे हैं। इस कारण शिक्षकों को अपनी जेब से राशि खर्च करके चावल स्कूलों तक पहुंचाने पड़ रहे हैं। कई बार मांग करने के बाद भी राज्य सरकार व शिक्षा विभाग ने इस राशि में बढ़ोतरी नहीं की है। ज्यादा परेशानी दूर दराज और पहाड़ी इलाकों में सामने आ रही है।
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सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील योजना चलाने के लिए शिक्षकों को चावल सीएपीडी विभाग से उपलब्ध करवाए जाते हैं। विभाग छह महीने का कोटा एक साथ ही शिक्षकों को जारी कर देता है। शिक्षकों को इन चावलों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए एक किलो चावल 1.25 रुपये के हिसाब से कैरेज चार्ज देता है।
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एक क्विंटल चावल के 125 रुपये शिक्षकों को मिलते हैं। जिनके स्कूलों तक वाहन जाता है, उनके लिए कैरेज चार्ज पर्याप्त है, लेकिन जम्मू संभाग में सैकड़ों सरकारी स्कूल पहाड़ी पर हैं। वहां तक वाहन नहीं पहुंचता है। मजबूरन शिक्षक चावल को घोड़ों पर लाद कर स्कूलों तक पहुंचाते हैं। इस तरह इन स्कूलों में मिड-डे-मील योजना चल पाती है।
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यह परेशानी सबसे अधिक उधमपुर, राजोरी, पुंछ, किश्तवाड़, डोडा, भद्रवाह जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में हैं। शिक्षकों के लिए कैरेज चार्ज की परेशानी दिन व दिन बढ़ती जा रही है। कई बार तो शिक्षकों को नियुक्त की गई राशि भी समय पर नहीं मिलती है। शिक्षकों का कहना है कि जेब से अतिरिक्त राशि खर्च करके मिड-डे-मील चला रहे हैं।
कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने कैरेज चार्ज बढ़ाने की मांग को रख चुके हैं, लेकिन इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। अगर शिक्षा विभाग ने जल्द इसके लिए प्रयास नहीं किए तो आने वाले दिनों में परेशानी दोगुनी बढ़ जाएगी।
डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन आरए इंकलाबी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि पहाड़ी इलाकों में मिड-डे-मील के चावल पहुंचाने के लिए कैरेज चार्ज कम हैं। इस पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। उम्मीद है कि समस्या जल्द हल होगी।