आतंकी हमलों में स्थानीय गाइडों की उपस्थिति बनी पहेली
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आतंकी हमलों में स्थानीय गाइडों की उपस्थिति पुलिस के लिए पहेली बनती जा रही है। आतंकी घटनाओं में इनके शामिल होने की सूचना तो सामने आती है, लेकिन इनकी बाद में कोई पकड़ नहीं होती। यही कारण है कि आतंकी हमलों की जांच भी दम तोड़ रही है।
आतंकी हमला होने के बाद चलने वाली कार्रवाई इस कदर ढीली है कि अभी तक चालान पेश नहीं हुए। इसमें अरनिया के कठार में हुआ आतंकी हमला मुख्य रूप से शामिल है। इसमें चार आतंकियों समेत 11 लोगों की जान चली गई थी।
जानकारी के अनुसार कठार हमले को तीन महीने से अधिक का समय हो गया है, लेकिन अभी तक इसकी एफएसएल रिपोर्ट नहीं आई। न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई। इस हमले में स्थानीय गाइड होने की सूचना भी सामने आई थी।
आतंकियों के पास खाने-पीने का सामान और कुछ भारतीय करंसी के पैसे भी मिले थे। स्थानीय गाइड की मदद से आतंकी भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे, लेकिन अभी तक गाइडों की कोई सूचना नहीं मिली।
पुलिस अब तक गाइडों की तलाश नहीं कर पाई
अभी एक महीना पहले ही अखनूर के परगवाल सेक्टर से तीन आतंकियों के घुसपैठ होने की खबर आई थी। इसमें दो स्थानीय गाइड होने की सूचना भी सामने आई। गाइडों की मदद से आतंकी उधमपुर तक पहुंच गए और वहां से गायब हो गए, लेकिन पुलिस अब तक गाइडों की तलाश नहीं कर पाई।
आतंकी हमला होने के बाद होने वाली जांच प्रक्रिया कमजोर पड़ रही है। इससे आतंकी हमलों की वजह पता नहीं चल पाती। इसके बारे में एसपी हेडक्वार्टर, रंधीर सिंह का कहना है कि अरनिया कांड की तह तक जाने में अभी वक्त लगेगा।
सिंह का कहना है कि अरनिया हमले में गाइडों की उपस्थिति नहीं थी। अखनूर के परगवाल सेक्टर से हुई घुसपैठ में गाइडों का हाथ होने पर उन्होंने कहा कि ऐसी सूचनाएं अफवाह होती हैं। वहां कोई गाइड की सूचना नहीं है।