{"_id":"61f87459a5e61ddb9e8299b2b56f330b","slug":"news-about-mobile-schools-in-jammu-kashmir-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपग्रेड नहीं हो रहे सरकारी मोबाइल स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपग्रेड नहीं हो रहे सरकारी मोबाइल स्कूल
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 23 Jan 2015 11:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य में चल रहे सरकारी मोबाइल स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की परेशानियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। शिक्षा विभाग की तरफ से इन स्कूलों में सुविधाएं प्रदान करने को लेकर अभी तक कोई योजना तैयार नहीं की गई है। आज भी विद्यार्थी पुरानी योजनाओं पर ही सुविधाएं हासिल कर रहे हैं।
विज्ञापन
विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी इन स्कूलों का अपग्रेड न होना है। अपग्रेड न होने के कारण पांचवीं के बाद विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। गुज्जर बक्कर समुदाय के बच्चे शिक्षा की सुविधा से वंचित न रह जाए, इसी को लेकर राज्य में सरकारी मोबाइल स्कूल खोले गए हैं। वर्तमान में स्कूलों की संख्या 291 है।
विज्ञापन
सर्दियों के सीजन में यह स्कूल जम्मू संभाग के मैदानी इलाकों में चलते हैं तो गर्मियों में यह सारे स्कूल कश्मीर संभाग के पहाड़ी इलाकों में चलते हैं। जब गुज्जर बक्करवाल के डेरे घाटी या फिर जम्मू की तरफ निकलते हैं तो शिक्षक भी विद्यार्थियों के साथ सारा रिकार्ड लेकर इनके साथ चल पड़ते हैं।
विज्ञापन
यह सभी स्कूल खुले मैदान में चलते हैं। इनके लिए इमारत की सुविधा नहीं है। शिक्षकों की तरफ से सर्दियों के दौरान इन स्कूलों के लिए इमारत की मांग की जा रही है, जबकि गर्मियों में टेंट मांगे जा रहे हैं। अभी तक मांगें पूरी नहीं हो पाई हैं।
मानसून में जब बारिशों का दौर शुरू होता है तो टेंट न होने के कारण मजबूरन विद्यार्थियों को छुट्टी करनी पड़ती है। जब तक बारिश रहती है, स्कूल भी बंद ही रहते हैं। इन स्कूलों के आसपास के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी न के बराबर हैं।
किसी विद्यार्थी के बीमार होने पर उसको अस्पताल तक पहुंचाना काफी परेशानी का काम होता है। इन स्कूलों के लिए सबसे बड़ी परेशानी इनका अपग्रेड न होना है। मोबाइल स्कूल प्राइमरी तक हैं और इनमें पांचवीं तक शिक्षा दी जा रही है। पांचवीं पास करने के बाद विद्यार्थियों की शिक्षा आगे नहीं बढ़ पाती है। मजबूरन विद्यार्थियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है।
इन स्कूलों को लगातार अपग्रेड करने की मांग की जा रही है। अगर इनको अपग्रेड कर दिया जाता है तो विद्यार्थियों को आठवीं तक शिक्षा मिल सकेगी और इससे भविष्य में विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा। डिप्टी डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन केके शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग मोबाइल स्कूलों में सुविधाएं देने को लेकर लगातार काम कर रहा है। जल्द से जल्द मांगों को पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।