अस्पताल से चुराकर अमीर परिवार को बेची मासूम
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उधमपुर जिला अस्पताल के वार्ड से एक नवजात बच्ची के अपहरण का मामला प्रकाश में आया। नवजात के परिवार वालों ने एक अस्पताल में काम करने वाली एक आशा के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवाया।
आनन-फानन में पुलिस ने आशा के घर पर छापेमारी की, लेकिन वह फरार हो चुकी थी। उसके बेटे को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
'बच्ची की तबियत खराब है, तुम घर जाओ'
नवजात के पिता संजय कुमार ने बताया कि 16 अगस्त को प्रसव के लिए पत्नी रीतू देवी को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। 17 की सुबह करीब ग्यारह बजे उसकी पत्नी ने बच्ची को जन्म दिया।
चार बजे के करीब आशा इंजेक्शन लगाने की बात कहकर बच्ची को उठा ले गई। एक घंटे के बाद जब आशा वर्कर से पूछा तो उसने बताया कि बच्ची की हालत गंभीर है।
उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया है। 18 अगस्त को उसकी पत्नी को जिला अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
'बच्ची तुम्हारे घर पहुंच जाएगी'
बच्ची के बारे में पूछे जाने पर आशा ने कहा कि सभी घर चले जाएं, वह बच्ची को लेकर उनके घर पर पहुंच जाएगी। इस पर सभी घर चले गए। पूरा दिन इंतजार करते रहे, लेकिन आशा बच्ची को नहीं आई।
21 अगस्त वीरवार को फिर आशा से संपर्क किया गया। तब उसने बताया कि उसने बच्ची को बहुत अमीर परिवार को सौंप दिया है। चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। बच्ची पूरी तरह सुरक्षित है।
बच्ची के बादले मांगे 60 हजार रुपए
जब उन्होंने आशा पर ज्यादा दबाव बनाया तो वह बच्ची लौटाने के बदले 60 हजार रुपये की मांग करने लगी।
इस शिकायत पर पुलिस ने तुरंत आशा वर्कर के घर पर दबिश देकर उसके बेटे को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। कार्रवाई करते हुए एमएच स्थित एक घर से नवजात बच्ची को बरामद कर लिया है।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें बताया है कि पूरी जांच के बाद बच्ची सौंप दी जाएगी, तब तक वह पुलिस सुरक्षा में रहेगी। इस बारे में पुलिस अधिकारी कुछ भी बताने से बच रहे हैं।