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लापता वकील के नहीं मिलने पर हाईकोर्ट सख्त, नई सिट गठित
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 03 Aug 2016 10:53 AM IST
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अदालत
- फोटो : Demo Pic.
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हाईकोर्ट ने नगरोटा से लापता हुए वकील रमण वजीर की तलाश के लिए नई सिट का गठन किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच अभी तक हवा में चल रही है और सीनियर अधिकारी के नेतृत्व में सिट का गठन किया जाना था।
मुख्य न्यायाधीश के बार एसोसिएशन की प्रार्थना को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका करार देने के फैसले पर न्यायाधीश ताशी रबसटन ने नई सिट का गठन करने के आदेश दिए।
इस विशेष जांच टीम (सिट) मेें एसपी साउथ शहजाद सलारिया, एसडीपीओ नगरोटा अमित शर्मा, एसएचओ रियासी दिलीप सिंह बिलोरिया, क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर परवेज सज्जाद, हाईकोर्ट के सीनियर प्रोसीक्यूटिंग अफसर अरविंद राठौर, सब इंस्पेक्टर कुनाल सिंह को शामिल किया है। हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया कि इन उक्त अधिकारियों की टीम गठित करें।
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क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर सज्जाद को तुरंत रिलीव करके सिट के लिए काम करने के आदेश दिए। जब तक रमण वजीर की तलाश नहीं हो जाती है, सिट इस मामले में ही छानबीन करेगी। सुबह जैसे ही केस की सुनवाई शुरू हुई, हाईकोर्ट ने आईजीपी जम्मू, एसएसपी जम्मू, एसपी रूरल जम्मू को कोर्ट में तुरंत पेश होने के आदेश दिए।
कोर्ट में इन अधिकारियों ने एसडीपीओ नगरोटा की अध्यक्षता मेें बनाई सिट की रिपोर्ट पेश की। बार एसोसिएशन इस सिट पर अपनी राय पेश करते हुए एक सीनियर अधिकारी को अध्यक्ष बनाने की अपील की। कोर्ट ने बार एसोसिएशन के सीनियर वकीलों से भी संपर्क करने की सलाह दी।
वकील की तलाश के लिए पुलिस का बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिनव शर्मा, एडवोकेट सुनील सेठी, एडवोकेट भूपेंद्र सलाथिया, राजेश कोतवाल, सुभाष सिंह जंवाल, अब्दुल राउफ लोन सहयोग करेंगे। वकीलों की टीम केवल सहयोग करेगी और पुलिस जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
हाईकोर्ट ने गंभीरता जताई कि पिछले तीन दिनों से पुलिस ने क्या कार्रवाई की है, जबकि पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। तलाश में देरी के कारण ही रमण वजीर का पता नहीं चल पाया है। अगर पुलिस इस केस को हल नहीं कर पाई तो आईजीपी और एसएसपी अनहोनी के जिम्मेदार होंगे।
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मुख्य न्यायाधीश के बार एसोसिएशन की प्रार्थना को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका करार देने के फैसले पर न्यायाधीश ताशी रबसटन ने नई सिट का गठन करने के आदेश दिए।
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इस विशेष जांच टीम (सिट) मेें एसपी साउथ शहजाद सलारिया, एसडीपीओ नगरोटा अमित शर्मा, एसएचओ रियासी दिलीप सिंह बिलोरिया, क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर परवेज सज्जाद, हाईकोर्ट के सीनियर प्रोसीक्यूटिंग अफसर अरविंद राठौर, सब इंस्पेक्टर कुनाल सिंह को शामिल किया है। हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया कि इन उक्त अधिकारियों की टीम गठित करें।
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क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर सज्जाद को तुरंत रिलीव करके सिट के लिए काम करने के आदेश दिए। जब तक रमण वजीर की तलाश नहीं हो जाती है, सिट इस मामले में ही छानबीन करेगी। सुबह जैसे ही केस की सुनवाई शुरू हुई, हाईकोर्ट ने आईजीपी जम्मू, एसएसपी जम्मू, एसपी रूरल जम्मू को कोर्ट में तुरंत पेश होने के आदेश दिए।
कोर्ट में इन अधिकारियों ने एसडीपीओ नगरोटा की अध्यक्षता मेें बनाई सिट की रिपोर्ट पेश की। बार एसोसिएशन इस सिट पर अपनी राय पेश करते हुए एक सीनियर अधिकारी को अध्यक्ष बनाने की अपील की। कोर्ट ने बार एसोसिएशन के सीनियर वकीलों से भी संपर्क करने की सलाह दी।
वकील की तलाश के लिए पुलिस का बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिनव शर्मा, एडवोकेट सुनील सेठी, एडवोकेट भूपेंद्र सलाथिया, राजेश कोतवाल, सुभाष सिंह जंवाल, अब्दुल राउफ लोन सहयोग करेंगे। वकीलों की टीम केवल सहयोग करेगी और पुलिस जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
हाईकोर्ट ने गंभीरता जताई कि पिछले तीन दिनों से पुलिस ने क्या कार्रवाई की है, जबकि पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। तलाश में देरी के कारण ही रमण वजीर का पता नहीं चल पाया है। अगर पुलिस इस केस को हल नहीं कर पाई तो आईजीपी और एसएसपी अनहोनी के जिम्मेदार होंगे।