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Jammu News: प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाए जाएंगे नए आपराधिक कानून
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। तीन नए आपराधिक कानून- भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 (बीएसए), अब प्रदेश के विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य छात्रों को देश के नए कानूनी ढांचे से परिचित कराना और उन्हें एक जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक के रूप में विकसित करना है।
जम्मू-कश्मीर के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों को इस विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत छात्रों के बीच संवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर प्रतियोगिता जैसी शैक्षणिक गतिविधियां की जाएंगी जिससे वे कानूनों की मूल अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
इन नए विषयों को प्रभावी रूप से पढ़ाने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को इन संहिताओं के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। आने वाले समय में यह मॉड्यूल एनसीईआरटी की वेबसाइट के साथ-साथ राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी पर भी डिजिटल रूप में सुलभ होंगे।
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इन नए पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को भारत की न्याय प्रणाली, नागरिक अधिकारों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और साक्ष्य की प्रक्रिया से जुड़े मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल न केवल विधि विषय में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देगी, बल्कि सभी छात्रों को संवैधानिक जागरूकता की दिशा में एक ठोस आधार भी प्रदान करेगी।
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कठुआ। तीन नए आपराधिक कानून- भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 (बीएसए), अब प्रदेश के विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य छात्रों को देश के नए कानूनी ढांचे से परिचित कराना और उन्हें एक जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक के रूप में विकसित करना है।
जम्मू-कश्मीर के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों को इस विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत छात्रों के बीच संवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर प्रतियोगिता जैसी शैक्षणिक गतिविधियां की जाएंगी जिससे वे कानूनों की मूल अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
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इन नए विषयों को प्रभावी रूप से पढ़ाने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को इन संहिताओं के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। आने वाले समय में यह मॉड्यूल एनसीईआरटी की वेबसाइट के साथ-साथ राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी पर भी डिजिटल रूप में सुलभ होंगे।
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इन नए पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को भारत की न्याय प्रणाली, नागरिक अधिकारों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और साक्ष्य की प्रक्रिया से जुड़े मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल न केवल विधि विषय में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देगी, बल्कि सभी छात्रों को संवैधानिक जागरूकता की दिशा में एक ठोस आधार भी प्रदान करेगी।