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एनईईटी मामला: जम्मू-कश्मीर ने दिया अनुच्छेद 370 का हवाला
ब्यूरो, अमर उजाला/नई दिल्ली
Updated Fri, 06 May 2016 11:36 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Getty Images
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीएसई को नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (एनईईटी) दो चरणों में आयोजित करने की अनुमति दिए जाने के बाद राज्य सरकारों की एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
एनईईटी का पहला फेज एक मई को आयोजित हो गया, जबकि दूसरा फेज 24 जुलाई को होगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि राज्य को अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जे का हवाला दिया गया। राज्य सरकार के वकील ने कहा कि उच्च शिक्षा समवर्ती सूची है।
ऐसे में केंद्रीय कानून को राज्य में प्रभावी बनाने के लिए उसका राज्य विधानसभा में पारित होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को अपने मेडिकल कालेजों में दाखिले के लिए अपनी परीक्षा आयोजित करने का अधिकार है। न्यायमूर्ति अनिल आर दबे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह स्पष्ट करने से इनकार किया कि राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं या नहीं।
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पीठ ने कहा कहा है कि हमने राज्यों के रेगुलेशन पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन एनईईटी प्रभावी है। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब वकील ने कहा कि ऐसा विचार बन गया है कि एमबीबीएस और डेंटल कोर्स के लिए राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं। वहीं, वीरवार को मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए निजी मेडिकल कालेजों को अपनी परीक्षाएं लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पीठ ने सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सालिसिटर पिंकी आनंद से पूछा कि क्या एनईईटी- दो परीक्षा में उन छात्रों को भी शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है जो एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं। केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल ने कहा कि सभी छात्रों को एनईईटी-दो परीक्षा में शामिल होने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
इस पर पीठ ने मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) से इस बारे में जवाब दाखिल करने को कहा। सॉलिसिटर जनरल ने परीक्षा को विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने की राज्य सरकारों की गुहार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अंग्रेजी भाषा में परीक्षा आयोजित करने का मकसद अंतरराष्ट्रीय मानक को बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि एनईईटी महज एकल प्रवेश परीक्षा है। सीटों का बंटवारा और आरक्षण तो राज्य सरकार को ही तय करना है। एनईईटी परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर सफल हुए छात्रों में से राज्य खुद मेरिट लिस्ट बना सकते हैं। शुक्रवार को सुनवाई जारी रहेगी।
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एनईईटी का पहला फेज एक मई को आयोजित हो गया, जबकि दूसरा फेज 24 जुलाई को होगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि राज्य को अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जे का हवाला दिया गया। राज्य सरकार के वकील ने कहा कि उच्च शिक्षा समवर्ती सूची है।
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ऐसे में केंद्रीय कानून को राज्य में प्रभावी बनाने के लिए उसका राज्य विधानसभा में पारित होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को अपने मेडिकल कालेजों में दाखिले के लिए अपनी परीक्षा आयोजित करने का अधिकार है। न्यायमूर्ति अनिल आर दबे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह स्पष्ट करने से इनकार किया कि राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं या नहीं।
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पीठ ने कहा कहा है कि हमने राज्यों के रेगुलेशन पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन एनईईटी प्रभावी है। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब वकील ने कहा कि ऐसा विचार बन गया है कि एमबीबीएस और डेंटल कोर्स के लिए राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं। वहीं, वीरवार को मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए निजी मेडिकल कालेजों को अपनी परीक्षाएं लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पीठ ने सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सालिसिटर पिंकी आनंद से पूछा कि क्या एनईईटी- दो परीक्षा में उन छात्रों को भी शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है जो एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं। केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल ने कहा कि सभी छात्रों को एनईईटी-दो परीक्षा में शामिल होने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
इस पर पीठ ने मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) से इस बारे में जवाब दाखिल करने को कहा। सॉलिसिटर जनरल ने परीक्षा को विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने की राज्य सरकारों की गुहार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अंग्रेजी भाषा में परीक्षा आयोजित करने का मकसद अंतरराष्ट्रीय मानक को बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि एनईईटी महज एकल प्रवेश परीक्षा है। सीटों का बंटवारा और आरक्षण तो राज्य सरकार को ही तय करना है। एनईईटी परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर सफल हुए छात्रों में से राज्य खुद मेरिट लिस्ट बना सकते हैं। शुक्रवार को सुनवाई जारी रहेगी।