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मैया जी तेरे कुंलडू-कुंडलू बाल मुख पर वणी-वणी पौंदे हो...
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जम्मू। चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो गए हैं। पहले दिन शहर के विभिन्न मंदिरों में आस्था का हुजूम दिखाई दिया। मंदिरों में तड़के से देर रात तक भक्तों का जमावड़ा रहा और मां के जयघोष गूंजते रहे। इसके साथ ही मैया जी तेरे कुंलडू-कुंडलू बाल मुख पर वणी-वणी पौंदे हो..., चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है के भजनों से मंदिर गूंजते रहे। मां के चरणों में हाजिरी लगाने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। शहर के बावे वाली माता मंदिर, रघुनाथ मंदिर, मां लक्ष्मी मंदिर, लक्ष्मी नारायण और कोल कंडोली में पहले दिन विशेष पूजा की गई। इसमें हजारों भक्तों ने हिस्सा लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है। नवरात्र के शुभारंभ पर पहले दिन कलश स्थापना, अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करने से हुआ। मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। नवरात्र का पहल दिन होने से सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कलश की स्थापना की। बावे वाली माता मंदिर में तड़के से भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था जो देर रात तक जाी रहा। दो साल बाद कोरोना की पाबंदियां नहीं होने पर भक्तों में मां के दर्शन के लिए काफी उत्सहित दिखाई दिया। लोगों ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।
शहर से पांच किमी दूर कौल कंडोली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई, जिसमें काफी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। मंदिर में भी तड़के से ही दर्शन करने वालों पहुंचे थे और देर रात तक ये सिलसिला शुरू हुआ। महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधिविधान से की जाती है। मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री है। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं।
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नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है। नवरात्र के शुभारंभ पर पहले दिन कलश स्थापना, अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करने से हुआ। मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। नवरात्र का पहल दिन होने से सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कलश की स्थापना की। बावे वाली माता मंदिर में तड़के से भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था जो देर रात तक जाी रहा। दो साल बाद कोरोना की पाबंदियां नहीं होने पर भक्तों में मां के दर्शन के लिए काफी उत्सहित दिखाई दिया। लोगों ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।
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शहर से पांच किमी दूर कौल कंडोली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई, जिसमें काफी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। मंदिर में भी तड़के से ही दर्शन करने वालों पहुंचे थे और देर रात तक ये सिलसिला शुरू हुआ। महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधिविधान से की जाती है। मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री है। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं।
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