{"_id":"61f847823b0046049c6bea3e","slug":"navratr-jammu-city-news-jmu2529341179","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां आदिशक्ति की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्र कल से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां आदिशक्ति की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्र कल से
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। मां आदिशक्ति की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्र 02 फरवरी से शुरू होंगे। वहीं, 10 फरवरी को समाप्त होंगे और व्रत का पारणा 11 फरवरी को होगा।
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार दो फरवरी को सुबह 7:10 बजे से लेकर सुबह 8:31 बजे तक देवी दुर्गा के भक्त क्लश स्थापन, ज्योति प्रज्ज्वलन और साख लगा सकते हैं। चैत्र या वसंत नवरात्र के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त दो और भी नवरात्र हैं। इनमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है।
पहला गुप्त नवरात्र माघ माह के शुक्ल पक्ष में आता है, जबकि दूसरा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में। लोगों में इनके बारे में कम जानकारी होने और रहस्यमयी कारणों की वजह से इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। नौ दिन तक व्रत का संकल्प लेते हुए साधक नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना करते हैं। फिर अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। इन दोनों माता के नवरूपों की पूजा की जाती है वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन नौ दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं।
विज्ञापन
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार दो फरवरी को सुबह 7:10 बजे से लेकर सुबह 8:31 बजे तक देवी दुर्गा के भक्त क्लश स्थापन, ज्योति प्रज्ज्वलन और साख लगा सकते हैं। चैत्र या वसंत नवरात्र के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त दो और भी नवरात्र हैं। इनमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है।
पहला गुप्त नवरात्र माघ माह के शुक्ल पक्ष में आता है, जबकि दूसरा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में। लोगों में इनके बारे में कम जानकारी होने और रहस्यमयी कारणों की वजह से इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। नौ दिन तक व्रत का संकल्प लेते हुए साधक नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना करते हैं। फिर अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। इन दोनों माता के नवरूपों की पूजा की जाती है वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन नौ दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं।
विज्ञापन